दो आँखें बारह हाथ  

दो आँखें बारह हाथ
Do-Aankhen-Barah-Haath-2.jpg
निर्देशक वी शांताराम
निर्माता वी शांताराम
कलाकार वी. शांताराम और संध्या
प्रसिद्ध चरित्र आदिनाथ और चंपा
संगीत वसंत देसाई
गीतकार भरत व्‍यास
गायक लता मंगेशकर और मन्ना डे
प्रसिद्ध गीत ऐ मालिक तेरे बन्दे हम, ऐसे हों हमारे करम
प्रदर्शन तिथि 1957
अवधि 143 मिनट
भाषा हिन्दी
पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ फीचर फ़िल्म, सिल्वर बियर का पुरस्कार, सैमुअल गोल्डविन पुरस्कार, राष्‍ट्रपति का स्‍वर्ण पदक जीता, बेस्‍ट फ़िल्‍म ऑफ़ द ईयर
हिन्दी फ़िल्म उद्योग जिस समय अपने विकास के शुरुआती दौर में था उसी समय एक ऐसा फ़िल्मकार भी था जिसने कैमरे, पटकथा, अभिनय और तकनीक में तमाम प्रयोग कर दो आँखें बारह हाथ जैसी फ़िल्म भी बनाई थी। दो आँखें बारह हाथ जिसमें गांधी जी के ‘हृदय परिवर्तन’ के दर्शन से प्रेरित होकर छह कैदियों के सुधार की कोशिश की जाती है। दो आँखें बारह हाथ 1957 में प्रदर्शित हुई थी।
दो आँखें बारह हाथ

वी शांताराम ने सरल और सादे से कथानक पर बिना किसी लटके झटके के साथ एक कालजयी फ़िल्‍म बनाई थी। इस फ़िल्‍म में युवा जेलर आदिनाथ का किरदार खुद शांताराम ने निभाया। और उनकी नायिका बनीं संध्‍या। इसके अलावा कोई ज्‍यादा मशहूर कलाकार इस फ़िल्‍म में नहीं था। भरत व्‍यास ने फ़िल्‍म के गीत लिखे और संगीत वसंत देसाई ने दिया था। मुंबई में ये फ़िल्‍म लगातार पैंसठ हफ्ते चली थी। कई शहरों में इसने गोल्‍डन जुबली मनाई थी।[1]

कथावस्तु

कहानी एक युवा प्रगतिशील और सुधारवादी विचारों वाले जेलर आदिनाथ की है, जो क़त्‍ल की सज़ा भुगत रहे छह खूंखार कै़दियों को एक पुराने जर्जर फार्म-हाउस में ले जाकर सुधारने की अनुमति ले लेता है और तब शुरू होता है उन्‍हें सुधारने की कोशिशों का आशा-निराशा भरा दौर।[1]

निर्माण

राजकमल कला मंदिर के बैनर तले निर्मित और वी. शांताराम निर्देशित फ़िल्म दो आँखें बारह हाथ को भला कौन भूल सकता है। वी. शांताराम ने दो आँखें बारह हाथ फ़िल्म बनाई, तब उनकी उम्र सत्‍तावन साल थी और वो बहुत ही चुस्‍त-दुरूस्‍त हुआ करते थे। फ़िल्‍म में रोचकता और रस का समावेश करने के लिए संध्‍या को एक खिलौने बेचने वाली का किरदार दिया गया, जो जब भी खेत वाले बाड़े से गुजरती है तो कडि़यल और खूंखार क़ैदियों में उसे प्रभावित करने की होड़ लग जाती है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 शांताराम की फ़िल्म ‘दो आंखें बारह हाथ’ ने पूरे किये पचास साल। रेडियोवाणी पर इस फिल्‍म की बातें और गाने । (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) रेडियोवाणी। अभिगमन तिथि: 30 अगस्त, 2010
  2. रियाज, राजू कादरी। जज़्बा देशप्रेम का (हिन्दी) पत्रिका। अभिगमन तिथि: 30 अगस्त, 2010
  3. फ़िल्मों में बरसात का दृश्य (हिन्दी) समय दर्पण। अभिगमन तिथि: 30 अगस्त, 2010
  4. स्वदेश, संजय। हमारी फ़िल्में अब लोरी नहीं गाती (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) विस्फोट डॉट कॉम। अभिगमन तिथि: 30 अगस्त, 2010
  5. सामाजिक बदलाव का ज़रिया है फ़िल्में: वी शांताराम (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) जागरण। अभिगमन तिथि: 30 अगस्त, 2010
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