प्रणति भूमि  

प्रणति भूमि में जैन ग्रंथ 'कल्पसूत्र' के अनुसार तीर्थंकर महावीरजी का एक वर्षा काल व्यतीत किया जाना बताया गया है। अभिज्ञान संदिग्ध है।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 580 |


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