त्रिशला  

त्रिशला जैन धार्मिक मान्यतानुसार महावीर स्वामी की माता का नाम था। उन्हें 'पिर्यकारिणी' भी कहा जाता है।[1]

परिचय

जैन ग्रन्थ 'उत्तरपुराण' में तीर्थंकर और अन्य शलाका पुरुषों का वर्णन है। ग्रन्थ में लिखा है कि वैशाली के राजा चेटक के 10 पुत्र और सात पुत्रियाँ थीं। उनकी ज्येष्ठ पुत्री पिर्यकारिणी अर्थात त्रिशला का विवाह कुण्डग्राम के राजा सिद्धार्थ से हुआ था। भगवान महावीर के जन्म से पूर्व एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही अद्‍भुत रत्नवर्षा के बारे में सोच रही थीं। यह सोचते-सोचते ही वे गहरी नींद में सो गईं। उसी रात्रि को अंतिम प्रहर में महारानी ने सोलह शुभ मंगलकारी स्वप्न देखे। वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी का दिन था। सुबह जागने पर रानी ने महाराज सिद्धार्थ से अपने स्वप्नों की चर्चा की और उसका फल जानने की इच्छा प्रकट की।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पौराणिक कोश |लेखक: राणा प्रसाद शर्मा |प्रकाशक: ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 562, परिशिष्ट 'ग' |
  2. जानिए महारानी त्रिशला के 16 शुभ स्वप्न (हिन्दी) webdunia। अभिगमन तिथि: 08 मई, 2018।

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