कदम्ब  

Disamb2.jpg कदम्ब एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- कदम्ब (बहुविकल्पी)
कदम्ब
कदम्ब का पेड़
जगत पादप (Plantae)
गण जेनशियानेल्स (Gentianales)
कुल रूबियेसी (Rubiaceae)
जाति नियोलामार्किया (Neolamarckia")
प्रजाति कैडेम्बा (cadamba)
द्विपद नाम नियोलामार्किया कदम्बा (Neolamarckia cadamba")
फूल गेंद की तरह गोल लगभग 55 सेमी व्यास के होते हैं जिसमें अनेक उभयलिंगी पुंकेसर कोमल शर की भाँति बाहर की ओर निकले होते हैं।
तना कदम्ब का तना 100 से 160 सेंटीमीटर व्यास का, चिकना, सफेदी लिए हुए हल्के भूरे रंग का होता है।
अन्य जानकारी बाणभट्ट के प्रसिद्ध काव्य "कादम्बरी" की नायिका "कादम्बरी" का नाम भी कदम्ब वृक्ष के आधार पर है। इसी तरह भारवि, माघ और भवभूति ने भी अपने काव्य में कदम्ब का विशिष्ट वर्णन किया है।

कदम्ब एक प्रसिद्ध फूलदार वृक्ष है। कदम्ब का पेड़ काफ़ी बड़ा होता है। कदम्ब के पेड़ ग्रामीण क्षेत्रों में ज़्यादा होते हैं। इसके पत्ते बड़े और मोटे होते हैं जिनसे गोंद भी निकलता है। कदम्ब के पेड़ के पत्ते महुए के पत्तों जैसे और फल नीबू की तरह गोल होते है और फूल फलों के ऊपर ही होते हैं। फूल छोटे और खुशबुदार होते हैं। वर्षा ऋतु में जब यह फूलता है, तब पूरा वृक्ष अपने हल्के पीले रंग के छोटे-छोटे फूलों से भर जाता है। उस समय इसके फूलों की मादक सुगंध से ब्रज के समस्त वन और उपवन महकने लगते हैं। कदम्ब के वृक्ष में एल्केलायड कदम्बाई न. 3, अल्फाडीहाइड्रो कदम्बीन, ग्लैकोसीड्स एल्केलायड, आइसो- डीहाइड्रो कदम्बीन, बीटासिटोस्तीराल, क्लीनोविक एसिड, पेंतासायक्लीक, ट्रायटार्पेनिक एसिड, कदम्बाजेनिक एसिड, सेपोनिन, उत्पत्त तेल, क्वीनारिक एसिड आदि रासायनिक तत्वों की भरमार होती है, जिनकी वजह से कदम्ब देव वृक्ष की श्रेणी में आता है।

जाति एवं रंग

ब्रज में इसकी कई जातियां पायी जाती हैं, जिसमें श्वेत-पीत लाल और द्रोण जाति के कदंब उल्लेखनीय हैं। साधारणतया यहां श्वेत-पीप रंग के फूलदार कदंब ही पाये जाते हैं। किन्तु कुमुदवन की कदंबखंडी में लाल रंग के फूल वाले कदंब भी पाये जाते हैं। श्याम ढ़ाक आदि कुख स्थानों में ऐसी जाति के कदंब हैं, जिनमें प्राकृतिक रुप से दोनों की तरह मुड़े हुए पत्ते निकलते हैं। इन्हें 'द्रोण कदंब' कहा जाता है। गोवर्धन क्षेत्र में जो नवी वृक्षों का रोपड़ किया गया है, उनमें एक नये प्रकार का कदंब भी बहुत बड़ी संख्या में है। ब्रज के साधारण कदंब से इसके पत्ते भिन्न प्रकार के हैं तथा इसके फूल बड़े होते हैं, किन्तु इनमें सुगंध नहीं होती है। ब्रज में कदंब का वृक्ष सदा से बड़ा प्रसिद्ध और लोकप्रिय रहा है। राधा-कृष्ण की अनेक लीलाएँ इसी वृक्ष के सुगन्धित वातावरण में हुई थीं। मध्य काल में ब्रज के लीला स्थलों के अनेक उपवनों में अनेक उपवनों इस वहुत बड़ी संख्या में लगाया गया था। वे उपवन 'कदंबखंडी' कहलाते हैं। कदम्ब की कई सारी जातियाँ हैं जैसे-

  1. राजकदम्ब
  2. धूलिकदम्ब
  3. कदम्बिका

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. उपयोगी ढंग कदंब के (हिंदी) अभिव्यक्ति। अभिगमन तिथि: 25 जुलाई, 2014।
  2. ये कदम्ब का पेड़ (हिंदी) चेतना के स्वर उजाले की ओर। अभिगमन तिथि: 25 जुलाई, 2014।
  3. कदम्ब के वृक्ष का औषधीय प्रयोग (हिंदी) Natural Care:आयुर्वेदिक उपचार। अभिगमन तिथि: 25 जुलाई, 2014।
  4. ये कृष्ण का कदम्ब (हिंदी) मेरा समस्त (ब्लॉग)। अभिगमन तिथि: 25 जुलाई, 2014।

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