मधुमेह  

मधुमेह
मधुमेह के लक्षण
विवरण मधुमेह एक ख़तरनाक रोग है जिसका प्रभाव भारत में व्यापक रूप से फैल रहा है। यह बीमारी हमारे शरीर में अग्न्याशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है।
अन्य नाम डायबिटीज़, सुगर की बीमारी
प्रकार मधुमेह को तीन प्रकार के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है- प्रकार 1- इसे जुवेनाइल (किशोर, बचपन) मधुमेह या इंसुलिन निर्भर मधुमेह कहा जाता है। प्रकार 2- इसे देर से शुरू होने वाली या गैर इन्सुलिन निर्भर मधुमेह कहा जाता है।

प्रकार 3- 'जेस्टेशनल मधुमेह' - गर्भावस्था के दौरान शुरू हो जाने वाला मधुमेह होता है।

भारत में मधुमेह भारत को मधुमेह की राजधानी कहा जाता है। भारत में इसका सबसे विकृत स्वरूप उभरा है जो बहुत भयावह है। जीवनशैली में अनियमितता मधुमेह का बड़ा कारण है। एक दशक पहले भारत में मधुमेह होने की औसत उम्र चालीस साल की थी जो अब घट कर 25 से 30 साल हो चुकी है। 15 साल के बाद ही बड़ी संख्या में लोगों को मधुमेह का रोग होने लगा है। कम उम्र में इस बीमारी के होने का सीधा मतलब है कि चालीस की उम्र आते-आते ही बीमारी के दुष्परिणामों को झेलना पड़ता है।
कारण इंसुलिन नामक हॉर्मोन की कमी या इसकी कार्यक्षमता में कमी आने से 'मधुमेह रोग' या 'डायबिटीज़' हो जाती है।
नियंत्रण मधुमेह होने के कारण पैदा होने वाली जटिलताओं की रोकथाम के लिए नियमित आहार, व्यायाम, व्यक्तिगत स्वास्थ्य, सफाई और संभावित इंसुलिन इंजेक्शन अथवा खाने वाली दवाइयों (डॉक्टर के सुझाव के अनुसार) का सेवन आदि कुछ तरीके हैं।
संबंधित लेख विश्व मधुमेह दिवस, मिर्गी, ऑटिज़्म, डेंगू
अन्य जानकारी जापान में कानाजावा यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंस के वैज्ञानिकों ने इंसुलिन प्रतिरोधी हॉर्मोन की खोज करने का दावा किया है। उनका कहना है कि इससे मधुमेह की नई दवाएँ तैयार करने में बहुत मदद मिलेगी।

मधुमेह (अंग्रेज़ी:Diabetes) अथवा डायबिटीज़ एक ख़तरनाक रोग है जिसका प्रभाव भारत में व्यापक रूप से फैल रहा है। यह बीमारी हमारे शरीर में अग्न्याशय द्वारा इंसुलिन का स्त्राव कम हो जाने के कारण होती है। इसमें रक्त ग्लूकोज़ स्तर बढ़ जाता है, साथ ही इन मरीज़ों में रक्त कोलेस्ट्रॉल, वसा के अवयव भी असामान्य हो जाते हैं। धमनियों में बदलाव होते हैं। मधुमेह से पीड़ित मरीज़ों की आँखों, गुर्दों, स्नायु या लिगामेन्ट, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का ख़तरा बढ़ जाता है। मधुमेह ग्लूकोज़ (रक्त शर्करा) की चयापचय[1] का एक विकार है। इंसुलिन नामक हॉर्मोन की कमी या इसकी कार्यक्षमता में कमी आने से 'मधुमेह रोग' या 'डायबिटीज़' हो जाती है।

मधुमेह के कारण

मधुमेह जैसी बीमारी प्राकृतिक या अनुवांशिक कारणों से हो सकती है। यह एक ऐसा विकार है, जिसमें रक्त में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है। मधुमेह मुख्यत: दो कारणों से होता है, या तो शरीर में इंसुलिन का बनना बंद हो जाये या फिर शरीर में इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाये। दोनों ही परिस्थितियों में शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा बढ़ जाती है।[2]

मधुमेह इंसुलिन हॉर्मोन उदर की एक बड़ी ग्रंथि जिसे अग्न्याशय कहा जाता है, द्वारा उत्पादित होता है। हालांकि व्यक्ति आहार के रूप में सेवन जारी रखता है, खाने के रूप में ग्लूकोज़ की एक ताजा आपूर्ति जुड़ती रहती है, जो पहले से ही इंसुलिन की कार्यवाई के अभाव की वजह अप्रयुक्त ग्लूकोज़ से संतृप्त होती है, शरीर ऊर्जा की कमी से पीड़ित होने लगता है, जबकि ग्लूकोज़ शरीर की रक्त कोशिकाओं में प्रवेश करने की प्रतीक्षा में रहता है। परिणामस्वरूप, रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ने लगता है और अधिक होकर मूत्र के रूप में बाहर उत्सर्जन होने लगता है।[3]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. ऊर्जा उत्पादन के लिए ग्लूकोज़ की छिन्नता
  2. विश्‍व डायबिटीज़़ दिवस (हिन्दी) ऑनली माई हेल्थ। अभिगमन तिथि: 14 नवंबर, 2010
  3. मधुमेह (हिन्दी) हेल्थ एजुकेशन लाइब्रेरी। अभिगमन तिथि: 10 नवम्बर, 2010
  4. मधुमेह (हिन्दी) इंडिक जी। अभिगमन तिथि: 10 नवम्बर, 2010
  5. विश्व मधुमेह दिवस (हिन्दी) (एच.टी.एम) डी. एच. आर. सी. इंडिया। अभिगमन तिथि: 14 नवंबर, 2010

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