घी  

घी
  • मूलत: दुग्ध वसा, गाय के दूध में प्राकृतिक वसा संघटक और माखन का प्रमुख अवयव है। शुद्ध घी पिघले हुए मक्खन के समान ऊपर आ जाता है और इसे बाहर आसानी निकाला जा सकता है तथा इसे बिना प्रशीतित किए कई महीनों तक रखा जा सकता है।
  • घी का उपयोग भोजन बनाने और ख़ास व्यंजनों में किया जाता है। घी का प्रयोग दैनिक जीवन में किया जाता है- जैसे रोटी, परांठा, सब्जी आदि के लिए घी का प्रयोग किया जाता है।
  • रासायनिक रूप से घी अनिवार्यत: पॉल्मिटिक, ओलिइक, मेरिस्टिक और स्टीआरिक जैसे अम्लवसीय अम्लों से निकाले गए ट्राइग्लिसराइड के मिश्रण का बना होता है। घी के वसीय अम्ल का संयोजन इसे उत्पन्न करने वाले पशु के आहार के अनुसार भिन्न होता है। सम्पूर्ण संतुलित घी में इन अम्लों की मात्रा की गणना में रीचर्ट-मिस्सल या रीचर्ट-वोलनी संख्या महत्त्वपूर्ण है।

देसी घी

आयुर्वेद में घी को काफ़ी फ़ायदेमंद बताया गया है। आयुर्वेद घी की मेडिसिनल वैल्यू का बखान भी करता है। आयुर्वेद की कई ऐसी दवाएं हैं, जिनके निर्माण में देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है।

घी सेहत के लिए कई मायनों में फ़ायदेमंद है। ये हमारे ऑर्गन को दुरुस्त रखता है। घी हमारे शरीर में कई ऐसे रसायनों का निर्माण करता है, जो हमारी पाचन प्रक्रिया को आसान बनाते हैं। ख़ास बात यह कि हम घी में जब भी कोई दवा या दूसरे पौष्टिक तत्व मिलाते हैं तो उस दवा या तत्व की न्यूट्रीशनल वैल्यू दोगुनी हो जाती है। कई बीमारियों में घी खाने से काफ़ी आराम मिलता है। मसलन शरीर के कुछ ख़ास हिस्सों पर होने वाला फ्रेक्टर, त्वचा और आंखों के रोग और कई तरह की सजर्री इनमें शामिल हैं। घी हमारे शरीर को ताकत और त्वचा को चमक देता है। घी की तासीर ठंडी होती है, इसीलिए यह पेट की कई बीमारियों जैसे गैस्टिक अल्सर में काफ़ी आराम पहुंचाता है।

भ्रांतियां

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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