पार्किंसन  

पार्किन्‍सन रोग के मरीज़

पार्किन्‍सन / पार्किंसन रोग (Parkinson's disease) पार्किन्सोनिज्म / कम्पवात रोग आमतौर से 50 साल से अधिक उम्र वालों को होती है। यह मानसिक स्थिति के बदलाव संबंधित बीमारी है। इसकी पहचान हाथ पैर स्थिर रखने पर उसका कांपना, हाथ पैर जकड़न, लेकिन जब हाथ पैर गति करते हैं, तो उनमें कंपन नहीं होता। मानसिक स्थिति में बदलाव के कारण पार्किसन के मरीज़ की पूरे शरीर की आंतरिक क्रियाओं के साथ बाहरी क्रियाएं भी धीमी हो जाती हैं।[1]

इतिहास

चिकित्सा शास्त्र में बहुत कम बीमारियों के नाम किसी डाक्टर या वैज्ञानिक के नाम पर रखे गये हैं। आम तौर पर ऐसा करने से बचा जाता है। परन्तु लन्दन के फिजिशियन डॉ. जेम्स पार्किन्सन ने सन् 1817 में इस रोग का प्रथम वर्णिन किया था वह इतना सटीक व विस्तृत था कि आज भी उससे बेहतर कर पाना, कुछ अंशों में सम्भव नहीं माना जाता है। हालांकि नया ज्ञान बहुत सा जुड़ा है। फिर भी परम्परा से जो नाम चल पडा उसे बदला नहीं गया। डॉ. जेम्स पार्किन्सन के नाम पर इस बीमारी को जाना जाता है। इसके बाद से अब तक लगातार इस पर स्टडी चल रही है, लेकिन किसी ख़ास नतीजे तक नहीं पहुंचा जा सका है।[2] पार्किन्सोनिज्म का कारण आज भी रहस्य बना हुआ है, बावजूद इस तथ्य के कि उस दिशा में बहुत शोध कार्य हुआ है, बहुत से चिकित्सा वैज्ञानिकों ने वर्षों तक चिन्तन किया है और बहुत सी उपयोगी जानकारी एकत्र की है। वैज्ञानिक प्रगति प्रायः ऐसे ही होती है। चमत्कार बिरले ही होते हैं। 1917 से 1920 के वर्षों में दुनिया के अनेक देशों में फ्लू (या इन्फ्लूएन्जा) का एक ख़ास गम्भीर रूप महामारी के रूप में देखा गया। वह एक प्रकार का मस्तिष्क ज्वर था। जिसे एन्सेफेलाइटिस लेथार्जिका कहते थे क्योंकि उसमें रोगी अनेक सप्ताहों तक या महीनों तक सोता रहता था। उस अवस्था से धीरे-धीरे मुक्त होने वाले अनेक रोगियों को बाद में पार्किन्सोनिज्म हुआ। 1920 से 1940 तक के दशकों में माना जाता था कि पार्किन्सोनिज्म का यही मुख्य कारण है। सोचते थे, और सही भी था कि इन्फ्लूएंजा वायरस के कीटाणु मस्तिष्क की उन्हीं कोशिकाओं को नष्ट करते हैं जो मूल पार्किन्सन रोग में प्रभावित होती हैं। न्यूयार्क के प्रसिद्ध न्यूरालाजिस्ट लेखक डॉ. ऑलिवर सेक्स ने इन मरीज़ों पर किताब लिखी, उस पर अवेकनिग (जागना) नाम से फ़िल्म बनी - इस आधार पर कि लम्बे समय से सुषुप्त रहने के बाद कैसे ये मरीज़, नये युग में, नयी दुनिया में जागे। रिपवान विकल की कहानी की तरह। सौभाग्य से 1920 के बाद एन्सेफेलाइटिस लेथार्जिका के और मामले देखने में नहीं आए। लेकिन पार्किन्सोनिज्म रोग उसी प्रकार होता रहा है। अवश्य ही कोई और कारण होने चाहिये।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पार्किसन्स की शहर में फ़िक्र (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) bhaskar.com। अभिगमन तिथि: 17 मार्च, 2011
  2. 2.0 2.1 पार्किन्सोनिज्म का इतिहास (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) न्यूरो ज्ञान। अभिगमन तिथि: 17 मार्च, 2011
  3. 3.0 3.1 पार्किन्सन रोग (हिन्दी) (पी.एच.पी) jkhealthworld.com। अभिगमन तिथि: 17 मार्च, 2011
  4. पार्किन्‍सन रोग के लक्षण (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) न्यूरो ज्ञान। अभिगमन तिथि: 17 मार्च, 2011
  5. अब भी लाइलाज बनी हुई है पार्किन्सन बीमारी (हिन्दी) (पी.एच.पी) नवभारत टाइम्स। अभिगमन तिथि: 17 मार्च, 2011
  6. पार्किन्‍सोनिज्‍म – कारण (हिन्दी) (पी.एच.पी) neuroquizindia.com। अभिगमन तिथि: 17 मार्च, 2011

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