नींद में चलने की बीमारी  

नींद में चलता रोगी

नींद में चलना (अंग्रेज़ी: Somnambulism) अर्थात् स्लीपवाकिंग एक विचित्र प्रकार की गंभीर मनोवैज्ञानिक बीमारी है जो कि कुछ ही लोगों में पायी जाती है। जिसे सोमनाबुलिज्म (SOMNAMBULISM) या स्लीपिंग डिसऑर्डर भी कहा जाता है। इस रोग में रोगी नींद में ही चलने लगता है। इस बीमारी से ग्रसित रोगी रात में नींद से उठकर अपने बिस्तर से चलता है और एक जागे हुए मनुष्य की तरह विभिन्न कार्य को आसानी से कर देता है। उसे पता ही नहीं चलता कि वो रात को क्या कर रहा था। जब रोगी ऐसा कर रहा होता है तब वे अर्धजागृत अवस्था में होता है, लेकिन फिर से सो जाने के बाद जब वह सुबह जागता है तो उसे अपने द्वारा नींद में किए गए कार्य याद नहीं रहते। यह एक विचित्र बीमारी है जो कि स्नायुविक गड़बड़ी से होती है।

भारत में स्थिति

नींद में चलना एक विकार है। आंकड़ों के अनुसार इससे भारत के लगभग चौदह प्रतिशत किशोर इस रोग से पीड़ित होते है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार 4 से 8 वर्ष के बच्चों में सोमनाबुलिज्म की समस्या ज़्यादा देखने को मिलती है। स्लीपवाकिंग स्कूल जाने वाली उम्र के बच्चों में आम रूप से होता है। एक अध्ययन से पता चला है की लगभग 15% तक बच्चे जो कि 5 से 12 साल की उम्र के हैं वो अपनी नींद में कम से कम एक बार चलते हैं। लड़कियों की अपेक्षा लड़कों में नींद में चलने की बीमारी ज़्यादा पाई जाती है। बार बार स्लीपवाकिंग पुरुषों में आम होती है और बिस्तर में पेशाब करने के साथ होती है।

नींद में चलना एक मस्तिष्क रोग के साथ-साथ नींद का भी विकार है। यह तंत्रिका-तंत्र का मस्तिष्क विकार है। उदाहरण के लिए जैसे- जब हम जागृत अवस्था में होते हैं तो मस्तिष्क भी पूर्णतः जागृत अवस्था में होता है, परंतु नींद में चलने वालों के मस्तिष्क का एक हिस्सा तो गतिशील रहता है जबकि दूसरा हिस्सा सुप्त अवस्था में रहता है, जिसके कारण वे नींद में भी उठ कर चलने लगते है। लेकिन यह अवस्था ज़्यादा देर नहीं रहती, सिर्फ उतनी देर ही रहती है जब बच्चा चल रहा होता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ


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