अंतराबंध  

अंतराबंध (अंग्रेज़ी: Schizophrenia) कई मानसिक रोगों का समूह है, जिनमें बाह्य परिस्थितियों से व्यक्ति का संबंध असाधारण हो जाता है। कुछ समय पूर्व लक्षणों के थोड़ा-बहुत विभिन्न होते हुए भी रोग का मौलिक कारण एक ही माना जाता था, किंतु अब प्राय सभी सहमत हैं कि अंतराबंध जीवन की दशाओं की प्रतिक्रिया से उत्पन्न हुए कई प्रकार के मानसिक विकारों का समूह है। अंतराबंध को अंग्रेज़ी में 'डिमेंशिया प्रीकॉक्स' भी कहते हैं।

प्रकार

इस रोग के प्राय चार रूप पाए जाते हैं-

  1. सामान्य रूप में व्यक्ति अपनी चारों ओर की परिस्थितियों से अपने को धीरे-धीरे खींच लेता है, अर्थात्‌ अपने सुहृदों, मित्रों तथा व्यवसाय से, जिनसे वह पहले प्रेम करता था, उदासीन हो जाता है।
  2. दूसरे रूप में, जिसको 'यौवनमनस्कता' (हीबे फ्ऱीनिक) कहते हैं, रोगी के विचार तथा कर्म भ्रम पर आधारित होते हैं। यह रोग साधारणत: यौवनावस्था में होता है।
  3. तीसरे रूप में रोगी के मस्तिष्क का अंग-संचालक-मंडल विकृत हो जाता है या तो उसके अंगों की गति अत्यंत शिथिल हो जाती है। यहाँ तक कि वह मूढ़ और निश्चेष्ट सा पड़ा रहता है, या वह अति प्रचंड हो जाता है और भागने, दौड़ने, लड़ने, आक्रमण करने या हिंसात्मक क्रियाएँ करने लगता है।
  4. चौथा रूप अधिक आयु में प्रकट होता है और विचार संबंधी होता है। रोगी अपने को बहुत बड़ा व्यक्ति मानता है, या समझता है कि वह किसी के द्वारा सताया जा रहा है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 अंतराबंध (हिन्दी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 12 मार्च, 2015।

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=अंतराबंध&oldid=609731" से लिया गया