वृक्ष  

पीपल का वृक्ष

वृक्ष प्रकृति की अनमोल धरोहर व पर्यावरण के संरक्षक हैं। सृष्टि के प्रारंभिक क्षणों से पृथ्वी मानव की सहचरी रही है। इसी के सौरभमय रमणीय नैनाभिराम वातावरण में मानव ने स्वार्गिक आनंद का अनुभव किया है।[1]

श्रद्धा और आस्था

प्रकृति के प्रति मनुष्य के मन में एक अटूट श्रद्धा और आस्था रही है। निस्संदेह प्रकृति के अनमोल उपहारों में से ये हरे भरे तथा सुखद छाया और शीतलता प्रदान करने वाले वृक्ष किसके मन में आस्था के अंकुर उत्पन्न नहीं कर देते। अतः प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है, जिनमें वृक्षों का स्थान प्रकृति के उपहारों में से सर्वोपरि है।

मानव का आश्रयदाता

वृक्ष मानव के चिरंतर साथी हैं, कभी वो वृक्षों की छाया में बैठकर अपनी थकान मिटाता है, तो कभी इनके मधुर फल खाकर अपनी भूख शांत करता है। तभी तो वृक्षों को मनुष्य का आश्रयदाता माना जाता है। इस धरती पर प्राकृतिक शोभा को बढ़ने वाले ये वृक्ष ही हैं, धरती की गोद में यदि ये हरे भरे वृक्ष ना होते तो यह सारी पृथ्वी मरघट के सामान डरावनी और भयानक सी प्रतीत होती। वर्षा के हेतु ये वृक्ष ही हैं, इन वृषों से ही धरती की हरियाली जीवंत है।[1]

अशोक का वृक्ष

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 वृक्ष हमारे जीवन दाता (हिन्दी) jagranjunction। अभिगमन तिथि: 3 मार्च, 2016।

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