पलाश वृक्ष  

पलाश वृक्ष
पलाश वृक्ष
जगत पादप
गण फ़ेवलेस
कुल फ़ेवेसी
जाति ब्यूटिया
प्रजाति मोनोस्परमा
द्विपद नाम ब्यूटिया
प्राप्ति स्थान यह वृक्ष भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया के बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, थाईलैंड, कम्बोडिया, मलेशिया, श्रीलंका आदि में बहुतायत में देखा जा सकता है।
विशेष पलाश का फूल उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प है और इसको 'भारतीय डाकतार विभाग' द्वारा डाक टिकट पर प्रकाशित कर सम्मानित किया जा चुका है।
अन्य जानकारी आयुर्वेद में पलाश के अनेक गुण बताए गए हैं और इसके पाँचों अंगों- तना, जड़, फल, फूल और बीज से दवाएँ बनाने की विधियाँ दी गयी हैं।

पलाश वृक्ष अथवा 'पलास', 'परसा', 'ढाक', 'टेसू' भारत के सुंदर फूलों वाले प्रमुख वृक्षों में से एक है। प्राचीन काल से ही इस वृक्ष के फूलों से 'होली' के रंग तैयार किये जाते रहे हैं। ऋग्वेद में 'सोम', 'अश्वत्‍थ' तथा 'पलाश' वृक्षों की विशेष महिमा वर्णित है। कहा जाता है कि पलाश के वृक्ष में सृष्टि के प्रमुख देवता- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास है। अत: पलाश का उपयोग ग्रहों की शांति हेतु भी किया जाता है। ज्योतिष शास्त्रों में ग्रहों के दोष निवारण हेतु पलाश के वृक्ष का भी महत्त्वपूर्ण स्थान माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस वृक्ष का धार्मिक अनुष्ठानों में बहुत अधिक प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद में पलाश के अनेक गुण बताए गए हैं और इसके पाँचों अंगों- तना, जड़, फल, फूल और बीज से दवाएँ बनाने की विधियाँ दी गयी हैं।

परिचय

पलाश का पेड़ मध्यम आकार का, क़रीब 12 से 15 मीटर लंबा होता है। इसका तना सीधा, अनियमित शाखाओं और खुरदुरे तने वाला होता है। इसके पल्लव धूसर या भूरे रंग के रेशमी और रोयेंदार होते हैं। छाल का रंग राख की तरह होता है। इसकी विकास दर बहुत धीमी होती है। छोटा पलाश का पेड़ प्रति वर्ष लगभग एक फुट तक बढ़ जाता है। पूरी तरह खिलने के बाद जब यह अपने सारे पत्ते गिरा देता है, तब ये चटक फूल प्रकृति की अनूठी रचना बनकर इस प्रकार खिल उठते हैं, मानो बेरंग मौसम में रंग भर रहे हों। पलाश का वृक्ष भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया के बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान, थाईलैंड, कम्बोडिया, मलेशिया, श्रीलंका और पश्चिम इंडोनेशिया में बहुतायत में देखा जा सकता है। इतिहास और साहित्य में गंगा-यमुना के दोआब से लेकर मध्य प्रदेश तक पलाश वृक्ष के जंगल होने की पुष्टि होती है, लेकिन 19वीं शती के प्रारंभ में इनकी तेजी से कटाई होने के कारण अब ये कहीं-कहीं ही दिखाई देते हैं।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 1.3 पेड़ पलाश का (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 31 मई, 2013।
  2. हिंदी में अर्थ- 'क्या यह तोता है?'
  3. पेशाब में ग्लूकोज़ की अत्यधिक मात्रा

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