अंकोल  

अंकोल
अंकोल वृक्ष
जगत पादप (Plantae)
संघ एंजियोस्पर्म (Angiosperms)
गण कॉर्नेल्स (Cornales)
कुल कॉर्नेसी या एलेंगियेसी (Cornaceae or Alangiaceae)
जाति एलैंजियम (Alangium)
प्रजाति सैल्वीफ़ोलियम (salviifolium)
द्विपद नाम एलैंजियम सैल्वीफ़ोलियम (Alangium salviifolium)
अन्य जानकारी अपने रोग नाशक गुणों के कारण यह पौधा चिकित्साशास्त्र में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। रक्तचाप को कम करने में इसका पूर्ण बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुआ है।

अंकोल नामक पौधा अंकोट कुल का एक सदस्य है। वनस्पतिशास्त्र की भाषा में इसे 'एलैजियम सैल्वीफ़ोलियम' या 'एलैजियम लामार्की' भी कहते हैं। वैसे विभिन्न भाषाओं में इसे विभिन्न प्रकार के नामों से पुकारा जाता है, जो निम्नलिखित हैं-

  1. संस्कृत - अंकोट, दीर्घकील
  2. हिंदी दक्षिणी - ढेरा, थेल, अंकूल
  3. बंगला - आँकोड़
  4. सहारनपुर क्षेत्र - विसमार
  5. मराठी - आंकुल
  6. गुजराती - ओबला
  7. कोल - अंकोल एवं
  8. संथाली - ढेला

पौधे की आकृति

यह बड़े क्षुप या छोटे वृक्ष होते हैं, जो 3 से 6 मीटर लंबे होते हैं। इसके तने की मोटाई 2.5 फ़ुट होती है तथा यह भूरे रंग की छाल से ढका रहता है। पुराने वृक्षों के तने तीक्ष्णाग्र होने से काँटेदार या र्केटकीभूत होते हैं। इनकी पंक्तियाँ तीन से छह इंच लंबी, अपलक, दीर्घवतया लंबगोल, नुकीली या हल्की नोंक वाली, आधार की तरफ़ पतली या विभिन्न गोलाई लिए हुए होती हैं। इनका ऊपरी तल चिकना एवं निचला तल मुलायम रोमों से युक्त होता है। मुख्य शिरा से पाँच से लेकर आठ की संख्या में छोटी शिराएँ निकलकर पूरे पत्र दल में फैल जाती हैं। ये पत्तियाँ एकांतर क्रम में लगभग आधे इंच लंबे पूर्णवृत द्वारा पौधे की शाखाओं से लगी रहती हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अंकोल (हिंदी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 11 जून, 2013।

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