ओडिशा  

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ओडिशा
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नाम कलिंग, उत्कल, उत्कलरात, उड्र, ओद्र, ओद्रबिश
राजधानी भुवनेश्वर
राजभाषा(एँ) उड़िया भाषा
स्थापना 1 अप्रॅल, 1936
जनसंख्या 3,68,04,660 [1]
· घनत्व 236 [2] /वर्ग किमी
क्षेत्रफल 1,55,707 वर्ग किमी
भौगोलिक निर्देशांक 20°09′N 85°30′E
तापमान 25° C (औसत)
· ग्रीष्म 35-40° C (अधिकतम)
· शरद 3-4° C (न्यूनतम)
वर्षा 150 सेमी मिमी
ज़िले 30 [2]
सबसे बड़ा नगर भुवनेश्वर
मुख्य पर्यटन स्थल कोणार्क, पुरी, लिंगराज मन्दिर, सूर्य मंदिर कोणार्क
लिंग अनुपात 1000:972 ♂/♀
साक्षरता 63.08%
· स्त्री 50.51%
· पुरुष 71.35%
राज्यपाल एस. सी. जामिर
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक
विधानसभा सदस्य 147
लोकसभा क्षेत्र 21
राज्यसभा सदस्य 10
बाहरी कड़ियाँ अधिकारिक वेबसाइट
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ओडिशा भारत का एक प्रान्त है जो भारत के पूर्वी तट पर बसा है। ओडिशा उत्तर में झारखण्ड, उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल दक्षिण में आंध्र प्रदेश और पश्चिम में छत्तीसगढ़ से घिरा है तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। भौगोलिक लिहाज़ से इसके उत्तर में छोटा नागपुर का पठार है जो अपेक्षाकत कम उपजाऊ है लेकिन दक्षिण में महानदी, ब्राह्मणी, कालिंदी और वैतरणी नदियों का उपजाऊ मैदान है। यह पूरा क्षेत्र मुख्य रूप से चावल उत्पादक क्षेत्र है।

इतिहास

ओडिशा राज्य प्राचीन समय में 'कलिंग' के नाम से विख्यात था। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी (261 ई.पू.) में मौर्य सम्राट अशोक ने कलिंग विजय करने के लिए एक शक्तिशाली सेना भेजी थी, जिसका कलिंग के निवासियों ने जमकर सामना किया। सम्राट अशोक ने कलिंग तो जीता, परन्तु युद्ध के भीषण संहार से सम्राट का मन में वितृष्णा पैदा हो गई और अशोक की मृत्यु के बाद कलिंग फिर से स्वाधीन हो गया। ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में खारवेल राजा के अधीन कलिंग एक शक्तिशाली साम्राज्य बन गया। खारवेल की मृत्यु के बाद ओडिशा की ख्याति लुप्त हो गई। चौथी शताब्दी में विजय पर निकले समुद्रगुप्त ने ओडिशा पर आक्रमण किया और इस प्रदेश के पांच राजाओं को पराजित किया। सन् 610 में ओडिशा पर शशांक नरेश का अधिकार हो गया। शशांक के निधन के बाद हर्षवर्धन ने ओडिशा पर विजय प्राप्त की।

ओडिशा उच्च न्यायालय, कटक
Orissa High Court, Cuttack

सातवीं शताब्दी में ओडिशा पर गंग वंश का शासन रहा। सन् 795 में महाशिवगुप्त यजाति द्वितीय ने ओडिशा का शासन भार संभाला और ओडिशा के इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय शुरू हुआ। उन्होंने कलिंग, कनगोडा, उत्कल और कोशल को मिलाकर खारवेल की भाँति विशाल साम्राज्य की नींव रखी। गंग वंश के शासकों के समय में ओडिशा राज्य की बहुत उन्नति हुई। इस राजवंश के शासक राजा नरसिंह देव ने कोणार्क का विश्व भर में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर बनवाया था। 16 वीं शताब्दी के लगभग मध्य से 1592 तक ओडिशा पांच मुस्लिम राजाओं द्वारा शासित रहा। सन् 1592 में अकबर ने ओडिशा को अपने अधीन कर अपने शासन में शामिल कर लिया। मुग़लों के पतन के पश्चात् ओडिशा पर मराठों का अधिकार रहा। सन् 1803 में ब्रिटिश राज से पहले ओडिशा मराठा शासकों के अधीन रहा। 1 अप्रैल सन् 1936 को ओडिशा को स्वतंत्र प्रांत बनाया गया। स्वतंत्रता के बाद ओडिशा तथा इसके आसपास की रियासतों ने भारत सरकार को अपनी सत्ता सौंप दी। रियासतों (गवर्नर के अधीन प्रांतों) के विलय संबंधी आदेश 1949 के अंतर्गत जनवरी 1949 में ओडिशा की सभी रियासतों का ओडिशा राज्य में सम्पूर्ण विलय हो गया। ओडिशा के कलिंग, उत्कल और उद्र जैसे कई प्राचीन नाम हैं, परन्तु यह प्रदेश मुख्यत: भगवान जगन्नाथ की भूमि के लिए प्रसिद्ध है। भगवान जगन्नाथ ओडिशा के सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन से बहुत गहरे जुडे हुए हैं। विभिन्न समय में ओडिशा के लोगों पर जैन, ईसाई और इस्लाम धर्मो का प्रभाव पडा।

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में योगदान

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में उडीसा के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने योगदान दिया है जिसमें से प्रमुख हैं- सुभाष चंद्र बोस · गोपबंधु दास · हरे कृष्ण मेहताब · जगबंधु बख्शी ·

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 2001 की जनगणना के अनुसार
  2. 2.0 2.1 ORISSA PROFILE (अंग्रेज़ी) (एच.टी.एम.एल) ओडिशा की आधिकारिक वेबसाइट। अभिगमन तिथि: 26 मई, 2011।

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