तपन सिन्हा  

तपन सिन्हा
तपन सिन्हा
पूरा नाम तपन सिन्हा
जन्म 2 अक्तूबर, 1924
जन्म भूमि कलकत्ता, बंगाल
मृत्यु 15 जनवरी, 2009
मृत्यु स्थान कोलकाता, पश्चिम बंगाल
पति/पत्नी अरुंधति देवी
कर्म-क्षेत्र निर्माता-निर्देशक
मुख्य फ़िल्में अंकुश, उपहार, काबुलीवाला, जिन्दगी-जिन्दगी, सफेद हाथी आदि
शिक्षा स्नातकोत्तर (भौतिकी)
विद्यालय कलकत्ता विश्वविद्यालय
पुरस्कार-उपाधि दादा साहब फाल्के पुरस्कार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी भारत का पहला लाईफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार तपन सिन्हा को दिया गया था।

तपन सिन्हा (अंग्रेज़ी: Tapan Sinha, जन्म: 2 अक्तूबर, 1924 – मृत्यु: 15 जनवरी, 2009) बांग्ला एवं हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक थे। इन्हें 2006 का दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी मिला था। तपन सिन्हा की फ़िल्में भारत के अलावा बर्लिन, वेनिस, लंदन, मास्को जैसे अंतरराष्ट्रीय ‍फ़िल्म समारोहों में भी सराही गईं।

जीवन परिचय

2 अक्टूबर 1924 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में जन्मे तपन सिन्हा की शिक्षा बिहार में हुई थी। वहाँ उनके परिवार के पास विशाल जमीन-जायदाद थी। 1945 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक तपन सिन्हा ने अपना करियर 'न्यू थिएटर' में साउंड इंजीनियर के रूप में शुरू किया। वहाँ रहते उन्होंने बिमल राय और नितिन बोस की कार्यशैली को गंभीरता से देखा और सीखा। फ़िल्मकार सत्येन बोस की फ़िल्म ‘परिबर्तन’ का साउंड डिजाइन करने के बाद तपन दा सिन्हा लंदन के पाइनवुड स्टूडियो ने आमंत्रित किया।[1]

फ़िल्म निर्देशन

तपन सिन्हा ने हमेशा कम बजट की फ़िल्में बनाईं। सामाजिक सरोकार के साथ उनकी फ़िल्में दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन करने में हमेशा कामयाब रहीं। यही वजह है कि उन्हें उन्नीस बार राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। सामाजिक, कॉमेडी, बाल फ़िल्मों के अलावा साहित्य आधारित फ़िल्में बनाने पर उन्होंने अधिक ध्यान दिया। रवीन्द्रनाथ ठाकुर की रचनाओं पर ‘काबुलीवाला’ तथा ‘क्षुधित पाषाण’ उनकी चर्चित फ़िल्में हैं। नारायण गांगुली कथा सैनिक पर उन्होंने ‘अंकुश’ फ़िल्म बनाई थी। शैलजानंद मुखर्जी की रचना कृष्णा पर उनकी फ़िल्म ‘उपहार’ लोकप्रिय फ़िल्म रही है। तपन सिन्हा की साहित्य आधारित फ़िल्में बोझिल न होकर सिनमैटिक गुणवत्ता से दर्शकों को लुभाने में कामयाब रहीं। बांग्ला के अलावा उन्होंने हिंदी में भी सफल फ़िल्में दीं। कभी-कभार तपन दा ने बंगाल के सबसे महँगे सितारे उत्तम कुमार या हिंदी में अशोक कुमार को अपनी फ़िल्मों का नायक बनाया। बंगाल में जन्मे नक्सलवाद और महिला उत्पीड़न को अधिक गहराई से उन्होंने रेखांकित किया। अमोल पालेकर को लेकर ‘आदमी और औरत’ बहुत चर्चित हुई थी।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 तपन सिन्हा : रे और घटक की परंपरा के निर्देशक (हिन्दी) प्रेसनोट। अभिगमन तिथि: 3 अक्टूबर, 2012।

संबंधित लेख

और पढ़ें
"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=तपन_सिन्हा&oldid=597488" से लिया गया