कानन देवी  

कानन देवी
कानन देवी
अन्य नाम कानन बाला
जन्म 22 अप्रैल, 1916
जन्म भूमि हावड़ा, ब्रिटिश बंगाल
मृत्यु 17 जुलाई, 1992
मृत्यु स्थान कोलकाता
अभिभावक रमेश चन्द्र दास (पिता)
कर्म भूमि बंगाल और मुंबई
कर्म-क्षेत्र अभिनेत्री, गायिका, फ़िल्म निर्माता
मुख्य फ़िल्में 'माँ', 'मुक्ति', 'जवाब', 'हॉस्पिटल', 'वनफूल', 'फैसला', 'आशा' और 'राजलक्ष्मी' आदि।
पुरस्कार-उपाधि 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' (1976)
प्रसिद्धि अभिनेत्री और गायिका
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी कानन देवी बंगाल की पहली अभिनेत्री थीं, जिन्हें 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' दिया गया था।

कानन देवी (अंग्रेज़ी: Kanan Devi, जन्म- 22 अप्रैल, 1916, हावड़ा, ब्रिटिश बंगाल; मृत्यु- 17 जुलाई, 1992, कोलकाता) भारत की प्रसिद्ध अभिनेत्री, गायिका और फ़िल्म निर्माता थीं। उनका मूल नाम 'कानन बाला' था। भारतीय सिनेमा जगत् में कानन देवी का नाम एक ऐसी शख्सियत के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने न केवल फ़िल्म निर्माण की विधा बल्कि अभिनय और पार्श्वगायन से भी दर्शकों के बीच अपनी ख़ास पहचान बनाई थी। बगैर प्रशिक्षण हासिल किए कानन ने गायन की दुनिया में प्रवेश किया और अभिनय के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। वह पहली बांग्ला कलाकार थीं, जिन्हें भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान के लिए 1976 में 'दादा साहेब फाल्के पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था।

फ़िल्मी शुरुआत

कानन देवी का जन्म पश्चिम बंगाल के हावड़ा में 22 अप्रैल, 1916 को एक मध्यम वर्गीय बंगाली परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था के दिनों में ही उनके दत्तक पिता रमेश चन्द्र दास की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक ज़िम्मेदारी को देखते हुए कानन देवी अपनी माँ के साथ काम में हाथ बंटाने लगीं। कानन देवी जब सिर्फ़ 10 वर्ष की ही थीं, तब अपने एक पारिवारिक मित्र की मदद से उन्हें 'ज्योति स्टूडियो' द्वारा निर्मित फ़िल्म 'जयदेव' में काम करने का अवसर मिला। इसके बाद कानन देवी को ज्योतिस बनर्जी के निर्देशन में राधा फ़िल्म्स के बैनर तले बनी कई फ़िल्मों में बतौर बाल कलाकार काम करने का मौका मिला। वर्ष 1934 में प्रदर्शित फ़िल्म 'माँ' बतौर अभिनेत्री कानन देवी के सिने कैरियर की पहली हिट फ़िल्म साबित हुई।

सफलता

कुछ समय के बाद कानन देवी न्यू थियेटर में शामिल हो गईं। इस बीच उनकी मुलाकात रायचंद बोराल से हुई, जिन्होंने कानन देवी के सामने हिन्दी फ़िल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा। तीस और चालीस के दशक में फ़िल्म अभिनेता या अभिनेत्रियों को फ़िल्मों में अभिनय के साथ ही पार्श्वगायक की भूमिका भी निभानी पड़ती थी। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए कानन देवी ने भी संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उस्ताद अल्लारक्खा और भीष्मदेव चटर्जी से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अनादि दस्तीदार से रवीन्द्र संगीत भी सीखा। वर्ष 1937 में प्रदर्शित फ़िल्म 'मुक्ति' बतौर अभिनेत्री कानन देवी के सिने करियर की सुपर हिट फ़िल्म साबित हुई। पी.सी.बरुआ के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म की ज़बरदस्त कामयाबी के बाद कानन देवी न्यू थियेटर की चोटी की कलाकारों में गिनी जाने लगी थीं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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