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}}'''राजेन्द्र कुमार पचौरी''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Rajendra Kumar Pachauri'', जन्म- [[20 अगस्त]], [[1940]], [[नैनीताल]], [[उत्तराखण्ड]]; मृत्यु- [[13 फ़रवरी]], [[2020]], [[नई दिल्ली]]) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित प्रसिद्ध पर्यावरणविद थे। उन्हें अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल्बर्ट ऑर्नल्ड (अल) गोर गुनियर के साथ संयुक्त रूप से [[2007]] का 'नोबेल शांति पुरस्कार' मिला था। उल्लेखनीय है कि जहाँ अल गोर को यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण-संवर्द्धन हेतु उनके व्यक्तिगत प्रयासों के लिए मिला, वहीं डॉ. राजेन्द्र कुमार पचौरी को यह पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला। अल गोर के साथ संयुक्त रूप से यह पुरस्कार इंटर-गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) नामक [[संयुक्त राष्ट्र|संयुक्त राष्ट्र संघ]] की संस्था को मिला था। डॉ. पचौरी इस संस्था के अध्यक्ष रहे। लेकिन इससे उनको मिले पुरस्कार का महत्त्व कम नहीं हो जाता। युद्ध में मोर्चे पर तो सिपाही लड़ते हैं, लेकिन जीत का श्रेय व्यूह रचना करने वाले सेनापति को मिलता है, ऐसा ही डॉ. पचौरी के विषय में कहा जा सकता है।<ref name="a">{{cite web |url=http://www.gyanipandit.com/rajendra-k-pachauri-in-hindi/ |title=राजेंद्र कुमार पचौरी जीवनी |accessmonthday=10 अगस्त |accessyear= 2016|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=ज्ञानी पण्डित |language=हिंदी }}</ref>
'''राजेन्द्र कुमार पचौरी''' ([[अंग्रेज़ी]]: ''Rajendra Kumar Pachauri'', जन्म- [[20 अगस्त]], [[1940]], [[नैनीताल]], [[उत्तराखण्ड]]) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित प्रसिद्ध पर्यावरणविद हैं। उन्हें अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल्बर्ट ऑर्नल्ड (अल) गोर गुनियर के साथ संयुक्त रूप से [[2007]] का 'नोबेल शांति पुरस्कार' मिला है। उल्लेखनीय है कि जहाँ अल गोर को यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण-संवर्द्धन हेतु उनके व्यक्तिगत प्रयासों के लिए मिला है, वहीं डॉ. राजेन्द्र कुमार पचौरी को यह पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला। अल गोर के साथ संयुक्त रूप से यह पुरस्कार इंटर-गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) नामक [[संयुक्त राष्ट्र|संयुक्त राष्ट्र संघ]] की संस्था को मिला है। डॉ. पचौरी इस संस्था के अध्यक्ष हैं। लेकिन इससे उनको मिले पुरस्कार का महत्त्व कम नहीं हो जाता। युद्ध में मोर्चे पर तो सिपाही लड़ते हैं, लेकिन जीत का श्रेय व्यूह रचना करने वाले सेनापति को मिलता है, ऐसा ही डॉ. पचौरी के विषय में कहा जा सकता है।<ref name="a">{{cite web |url=http://www.gyanipandit.com/rajendra-k-pachauri-in-hindi/ |title=राजेंद्र कुमार पचौरी जीवनी |accessmonthday=10 अगस्त |accessyear= 2016|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=ज्ञानी पण्डित |language=हिंदी }}</ref>
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==परिचय==
 
==परिचय==
 
डॉ. राजेन्द्र कुमार पचौरी का जन्म [[भारत]] में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर [[उत्तराखण्ड]] के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल [[नैनीताल]] में 20 अगस्त, 1940 को हुआ था। राजेन्द्र पचौरी ने डीजल लोकोमोटिव वर्क्स, [[वाराणसी]], [[उत्तर प्रदेश]] से अपने कैरियर का आगाज किया। यहां उन्होंने कई वरिष्ट प्रबंधकीय पदों पर कार्य को बखूबी अंजाम दिया। पचौरी जब भारत लौटे तो उनका अनुभव भी उनके साथ था। भारत लौटकर पचौरी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ़ कॉलेज, [[हैदराबाद]] में बतौर सीनियर फैकल्टी मेम्बर नियुक्त हुए। [[1975]] से [[1979]] तक आप यहीं कार्यरत रहे। यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक होगा कि हैदराबाद के इसी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ़ कॉलेज में देश के वरिष्ट नौकरशाहों (आईएएस) को प्रशिक्षित  किया जाता है।
 
डॉ. राजेन्द्र कुमार पचौरी का जन्म [[भारत]] में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर [[उत्तराखण्ड]] के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल [[नैनीताल]] में 20 अगस्त, 1940 को हुआ था। राजेन्द्र पचौरी ने डीजल लोकोमोटिव वर्क्स, [[वाराणसी]], [[उत्तर प्रदेश]] से अपने कैरियर का आगाज किया। यहां उन्होंने कई वरिष्ट प्रबंधकीय पदों पर कार्य को बखूबी अंजाम दिया। पचौरी जब भारत लौटे तो उनका अनुभव भी उनके साथ था। भारत लौटकर पचौरी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ़ कॉलेज, [[हैदराबाद]] में बतौर सीनियर फैकल्टी मेम्बर नियुक्त हुए। [[1975]] से [[1979]] तक आप यहीं कार्यरत रहे। यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक होगा कि हैदराबाद के इसी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ़ कॉलेज में देश के वरिष्ट नौकरशाहों (आईएएस) को प्रशिक्षित  किया जाता है।
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*इंटरनेशल एसोसिएशन फ़ॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स (आईएईई) वाशिंगटन, डी.सी. में पचौरी ने पहले प्रेसिडेंट तथा बाद में चेयरमैन का पदभार संभाला।
 
*इंटरनेशल एसोसिएशन फ़ॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स (आईएईई) वाशिंगटन, डी.सी. में पचौरी ने पहले प्रेसिडेंट तथा बाद में चेयरमैन का पदभार संभाला।
 
*राजेन्द्र पचौरी [[1992]] से एशियन एनर्जी इंस्टीट्युट के प्रेजिडेंट भी हैं।<ref name="a"/>
 
*राजेन्द्र पचौरी [[1992]] से एशियन एनर्जी इंस्टीट्युट के प्रेजिडेंट भी हैं।<ref name="a"/>
 
  
 
[[भारत सरकार]] ने [[पर्यावरण]] के क्षेत्र में योगदान के लिए राजेन्द्र पचौरी को [[2001]] में '[[पद्म विभूषण]]' से नवाजा। इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में वारोलिना स्टेट विश्वविद्यालय में एमएस और पीएच डी की उपाधि लेने वाले राजेन्द्र पचौरी के ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र के कार्यों को देखते हुए [[संयुक्त राष्ट्र]] ने [[1994]] से [[1999]] तक उन्हें अपना सलाहकार नियुक्त किया था। यही नहीं उनको [[14 जुलाई]], [[2006]] को जब [[फ़्राँस]] के राष्ट्रीय दिवस पर [[नई दिल्ली]] में कुछ चुनिंदा लोगों के साथ सम्मानित किया गया, तब [[भारत]] में फ़्राँस के राजदूत डी गिरार्ड ने कहा कि "आप केवल विज्ञानी ही नहीं, बल्कि एक जिंदादिल इनसान भी हैं।" पचौरी की इस जिंदादिली ने उन्हें और उनकी अध्यक्षता वाली संस्था को इस मुकाम तक पहुंचाया कि विश्व शांति के 'नोबल पुरस्कार' में भारत की हिस्सेदारी भी जुड़ गई। पर्यावरण संतुलन पर कार्य करने वाले राजेन्द्र पचौरी का मानना है कि "ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के कारण विश्व भर में कोई सुरक्षित नहीं है।" [[जून]], [[2007]] में एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में पर्यावरणीय असंतुलन पर लगाम लगाने के लिए भी पचौरी ने कई सामान्य सुझाव दिए थे, जिन पर अमल कर हम बढ़ते असंतुलन को कम कर सकते हैं। इन सुझावों में बिजली-पानी के कम प्रयोग तक का सुझाव भी शमिल था।<ref>{{cite web |url=http://hindi.indiawaterportal.org/content/%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%80 |title=नोबेल पचौरी |accessmonthday=10 अगस्त |accessyear= 2016|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=इण्डिया वॉटर पोर्टल |language= हिन्दी}}</ref>
 
[[भारत सरकार]] ने [[पर्यावरण]] के क्षेत्र में योगदान के लिए राजेन्द्र पचौरी को [[2001]] में '[[पद्म विभूषण]]' से नवाजा। इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में वारोलिना स्टेट विश्वविद्यालय में एमएस और पीएच डी की उपाधि लेने वाले राजेन्द्र पचौरी के ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र के कार्यों को देखते हुए [[संयुक्त राष्ट्र]] ने [[1994]] से [[1999]] तक उन्हें अपना सलाहकार नियुक्त किया था। यही नहीं उनको [[14 जुलाई]], [[2006]] को जब [[फ़्राँस]] के राष्ट्रीय दिवस पर [[नई दिल्ली]] में कुछ चुनिंदा लोगों के साथ सम्मानित किया गया, तब [[भारत]] में फ़्राँस के राजदूत डी गिरार्ड ने कहा कि "आप केवल विज्ञानी ही नहीं, बल्कि एक जिंदादिल इनसान भी हैं।" पचौरी की इस जिंदादिली ने उन्हें और उनकी अध्यक्षता वाली संस्था को इस मुकाम तक पहुंचाया कि विश्व शांति के 'नोबल पुरस्कार' में भारत की हिस्सेदारी भी जुड़ गई। पर्यावरण संतुलन पर कार्य करने वाले राजेन्द्र पचौरी का मानना है कि "ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ने के कारण विश्व भर में कोई सुरक्षित नहीं है।" [[जून]], [[2007]] में एक वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में पर्यावरणीय असंतुलन पर लगाम लगाने के लिए भी पचौरी ने कई सामान्य सुझाव दिए थे, जिन पर अमल कर हम बढ़ते असंतुलन को कम कर सकते हैं। इन सुझावों में बिजली-पानी के कम प्रयोग तक का सुझाव भी शमिल था।<ref>{{cite web |url=http://hindi.indiawaterportal.org/content/%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%80 |title=नोबेल पचौरी |accessmonthday=10 अगस्त |accessyear= 2016|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=इण्डिया वॉटर पोर्टल |language= हिन्दी}}</ref>
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राजेन्द्र पचौरी को [[1999]] में को दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे हेरिटेज फाउंडेशन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। [[2001]] में उन्हें [[प्रधानमंत्री]] के प्रति उत्तरदायी इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल का सदस्य बनाया गया। [[10 दिसंबर]], [[2007]] को '[[नोबेल पुरस्कार]]' प्राप्त करते समय उनकी विनम्रता दर्शनीय थी। राजेन्द्र पचौरी ने आईपीसीसी के लिए 'नोबेल पुरस्कार' ग्रहण करते हुए कहा था कि- "इस पुरस्कार के मिलने से जलवायु परिवर्तन की ज्वलंत समस्या की ओर समूचे विश्व का ध्यान आकृष्ट होगा।"
 
राजेन्द्र पचौरी को [[1999]] में को दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे हेरिटेज फाउंडेशन का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। [[2001]] में उन्हें [[प्रधानमंत्री]] के प्रति उत्तरदायी इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल का सदस्य बनाया गया। [[10 दिसंबर]], [[2007]] को '[[नोबेल पुरस्कार]]' प्राप्त करते समय उनकी विनम्रता दर्शनीय थी। राजेन्द्र पचौरी ने आईपीसीसी के लिए 'नोबेल पुरस्कार' ग्रहण करते हुए कहा था कि- "इस पुरस्कार के मिलने से जलवायु परिवर्तन की ज्वलंत समस्या की ओर समूचे विश्व का ध्यान आकृष्ट होगा।"
 
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==मृत्यु==
 
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डॉ. राजेंद्र पचौरी का निधन [[13 फ़रवरी]], [[2020]] को हुआ। 'द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट' (टेरी) के संस्थापक और पूर्व प्रमुख रहे राजेंद्र पचौरी का लंबी बीमारी के बाद हुआ। उन्हें [[हृदय]] की पुरानी परेशानी को लेकर राजधानी [[दिल्ली]] के एस्कार्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में भर्ती कराया गया था।
 
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==टीका टिप्पणी और संदर्भ==
 
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==संबंधित लेख==
 
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12:53, 15 फ़रवरी 2020 के समय का अवतरण

राजेन्द्र कुमार पचौरी
राजेन्द्र कुमार पचौरी
पूरा नाम राजेन्द्र कुमार पचौरी
जन्म 20 अगस्त, 1940
जन्म भूमि नैनीताल, उत्तराखण्ड
मृत्यु 13 फ़रवरी, 2020
मृत्यु स्थान नई दिल्ली, भारत
पति/पत्नी सरोज पचौरी
कर्म भूमि भारत
विद्यालय उत्तरी केरोलिना राज्य विश्वविद्यालय और ला मार्टिनियर, लखनऊ
पुरस्कार-उपाधि पद्म विभूषण (2001), नोबेल शांति पुरस्कार (2007)
प्रसिद्धि पर्यावरणविद
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी भारत सरकार की अनेक समितियों में भी राजेन्द्र पचौरी की सहभागिता रही है। बतौर सदस्य राजेन्द्र पचौरी ऊर्जा के क्षेत्र में दक्षता रखने वाले पैनल में शामिल किए गए थे। यह पैनल ऊर्जा मंत्रालय ने गठित किया था।
राजेन्द्र कुमार पचौरी (अंग्रेज़ी: Rajendra Kumar Pachauri, जन्म- 20 अगस्त, 1940, नैनीताल, उत्तराखण्ड; मृत्यु- 13 फ़रवरी, 2020, नई दिल्ली) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित प्रसिद्ध पर्यावरणविद थे। उन्हें अमेरिकी उपराष्ट्रपति अल्बर्ट ऑर्नल्ड (अल) गोर गुनियर के साथ संयुक्त रूप से 2007 का 'नोबेल शांति पुरस्कार' मिला था। उल्लेखनीय है कि जहाँ अल गोर को यह पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण-संवर्द्धन हेतु उनके व्यक्तिगत प्रयासों के लिए मिला, वहीं डॉ. राजेन्द्र कुमार पचौरी को यह पुरस्कार व्यक्तिगत रूप से नहीं मिला। अल गोर के साथ संयुक्त रूप से यह पुरस्कार इंटर-गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) नामक संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था को मिला था। डॉ. पचौरी इस संस्था के अध्यक्ष रहे। लेकिन इससे उनको मिले पुरस्कार का महत्त्व कम नहीं हो जाता। युद्ध में मोर्चे पर तो सिपाही लड़ते हैं, लेकिन जीत का श्रेय व्यूह रचना करने वाले सेनापति को मिलता है, ऐसा ही डॉ. पचौरी के विषय में कहा जा सकता है।[1]

परिचय

डॉ. राजेन्द्र कुमार पचौरी का जन्म भारत में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल में 20 अगस्त, 1940 को हुआ था। राजेन्द्र पचौरी ने डीजल लोकोमोटिव वर्क्स, वाराणसी, उत्तर प्रदेश से अपने कैरियर का आगाज किया। यहां उन्होंने कई वरिष्ट प्रबंधकीय पदों पर कार्य को बखूबी अंजाम दिया। पचौरी जब भारत लौटे तो उनका अनुभव भी उनके साथ था। भारत लौटकर पचौरी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ़ कॉलेज, हैदराबाद में बतौर सीनियर फैकल्टी मेम्बर नियुक्त हुए। 1975 से 1979 तक आप यहीं कार्यरत रहे। यहां यह उल्लेख करना प्रासंगिक होगा कि हैदराबाद के इसी एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ़ कॉलेज में देश के वरिष्ट नौकरशाहों (आईएएस) को प्रशिक्षित किया जाता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 राजेंद्र कुमार पचौरी जीवनी (हिंदी) ज्ञानी पण्डित। अभिगमन तिथि: 10 अगस्त, 2016।
  2. नोबेल पचौरी (हिन्दी) इण्डिया वॉटर पोर्टल। अभिगमन तिथि: 10 अगस्त, 2016।

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