वंशगुल्म  

वंशगुल्म विदर्भ का एक प्राचीन तीर्थ स्थान था। इस तीर्थ का उल्लेख महाभारत, वनपर्व[1] में इस प्रकार है-

'शोणस्य नर्मदायाश्च प्रभवे कुरुनंदन, वंशगुल्म उपस्पृश्य वाजिमेधफलं लभेत्।'
  • उपरोक्त वर्णन में वंशगुल्म तीर्थ की स्थिति अमरकंटक के निकट सिद्ध होती है।
  • प्राचीन काल में विदर्भ का इस स्थान तक विस्तार था तथा वंशगुल्म में इस देश की राजधानी थी।
  • वंशगुल्म स्थान का अभिज्ञान 'वासिम', मध्य प्रदेश से किया गया है।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. वनपर्व 85, 9
  2. ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |संकलन: भारतकोश पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 828 |

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