कायथा  

कायथा नामक पुरास्थल उज्जैन से लगभग 25 किलोमीटर दूरी पर पूर्व दिशा में चम्बल नदी की सहायक नदी काली सिंध के दाहिने तट पर काली मिट्टी के मैदान में स्थित है। कायथा पुरास्थल की खोज का श्रेय वी.एस. वाकणकर को जाता है, जिन्होंने इस कायथा पुरास्थल को सन् 1964 ई. में खोज निकाला था।

इतिहास

कायथा का समीकरण 'बृहज्जातक' नामक ग्रंथ में उल्लिखित प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य वराहमिहिर के जन्मस्थान 'कपित्थक' से किया जाता है। आजकल कायथा के टीले के अधिकतर भाग पर बस्ती बसी हुई है, इस कारण बहुत कम स्थान उत्खनन के लिए उपलब्ध हो पाते है। टीले के उत्तरी कायथा संस्कृति के लोग आकर छोटे क्षेत्र में बसे थे। बाद में अहाड़ (आहड़) संस्कृति के लोगों ने अपेक्षाकृत बड़े भू-भाग पर अपनी बस्ती बसायी। कायथा के टीले पर ताम्रपाषाण युग से लेकर गुहाकाल तक के स्तर मिले हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=कायथा&oldid=317661" से लिया गया