स्मिता पाटिल  

स्मिता पाटिल
स्मिता पाटिल
पूरा नाम स्मिता पाटिल
जन्म 17 अक्टूबर, 1955
जन्म भूमि पुणे, महाराष्ट्र
मृत्यु 13 दिसम्बर, 1986
अभिभावक शिवाजीराय पाटिल
पति/पत्नी राज बब्बर
संतान प्रतीक बब्बर
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनय
मुख्य फ़िल्में 'वारिस', 'मिर्च-मसाला', 'नमक हलाल', 'शक्ति', 'ग़ुलामी', 'मंथन', 'निशांत', 'भूमिका', 'आक्रोश', 'इंसानियत के दुश्मन' आदि।
शिक्षा स्नातक
विद्यालय 'फ़िल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया', पुणे
पुरस्कार-उपाधि 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' (1978), (1982); 'पद्मश्री' (1985)
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सर्वप्रथम श्याम बेनेगल ने स्मिता पाटिल को फ़िल्म 'चरणदास चोर' (1975) में अभिनय का मौका दिया था, जो एक बाल फ़िल्म थी।

स्मिता पाटिल (अंग्रेज़ी: Smita Patil, जन्म- 17 अक्टूबर, 1955, पुणे; मृत्यु- 13 दिसम्बर, 1986) हिन्दी फ़िल्मों की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। उन्होंने अपने सशक्त अभिनय से समानांतर सिनेमा के साथ-साथ व्यावसायिक सिनेमा में भी ख़ास पहचान बनाई थी। उत्कृष्ट अभिनय से सजी उनकी फ़िल्में 'भूमिका', 'मंथन', 'चक्र', 'शक्ति', 'निशांत' और 'नमक हलाल' आज भी दर्शको के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ती हैं। भारतीय संदर्भ में स्मिता पाटिल एक सक्रिय नारीवादी होने के अतिरिक्त मुंबई के महिला केंद्र की सदस्य भी थीं। वे महिलाओं के मुद्दों पर पूरी तरह से वचनबद्ध थीं। भारतीय सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें दो बार 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' और 'पद्मश्री' से भी सम्मानित किया गया था। हिन्दी फ़िल्मों के अलावा स्मिता पाटिल ने मराठी, गुजराती, तेलुगू, बांग्ला, कन्नड़ और मलयालम फ़िल्मों में भी अपनी ख़ास पहचान बनाई थी।

जन्म तथा शिक्षा

स्मिता पाटिल का जन्म 17 अक्टूबर, 1955 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूल की पढ़ाई महाराष्ट्र से ही पूरी की थी। स्मिता पाटिल एक राजनीतिक परिवार से सम्बन्ध रखती थीं, उनके पिता शिवाजीराय पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री थे, जबकि उनकी माँ समाज सेविका थी। स्मिता पाटिल ने 'फ़िल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया', पुणे से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी।

विवाह

स्मिता पाटिल का विवाह राज बब्बर के साथ सम्पन्न हुआ था, जो स्वयं भी हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेताओं में से एक हैं। राज बब्बर भारतीय राजनीति में भी एक जाना-पहचाना नाम है। स्मिता पाटिल तथा राज बब्बर पुत्र प्रतीक बब्बर के माता-पिता भी बने। प्रतीक बब्बर भी हिन्दी फ़िल्मों में सक्रिय हैं।

फ़िल्मी शुरुआत

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्मिता ने मराठी टेलीविजन में बतौर समाचार वाचिका काम किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात जाने माने फ़िल्म निर्माता-निर्देशक श्याम बेनेगल से हुई। श्याम बेनेगल उन दिनों अपनी फ़िल्म 'चरणदास चोर' (1975) बनाने की तैयारी में थे। श्याम बेनेगल को स्मिता पाटिल में एक उभरता हुआ सितारा दिखाई दिया और उन्होंने अपनी फ़िल्म में स्मिता पाटिल को एक छोटी-सी भूमिका निभाने का अवसर दिया।

भारतीय सिनेमा जगत में 'चरणदास चोर' को ऐतिहासिक फ़िल्म के तौर पर याद किया जाता है, क्योंकि इसी फ़िल्म के माध्यम से श्याम बेनेगल और स्मिता पाटिल के रूप में कलात्मक फ़िल्मों के दो दिग्गजों का आगमन हुआ। श्याम बेनेगल ने स्मिता पाटिल के बारे में एक बार कहा था कि "मैंने पहली नजर में ही समझ लिया था कि स्मिता पाटिल में गजब की स्क्रीन उपस्थिति है और जिसका उपयोग रूपहले पर्दे पर किया जा सकता है।" फ़िल्म 'चरणदास चोर' हालांकि बाल फ़िल्म थी, लेकिन इस फ़िल्म के जरिए स्मिता पाटिल ने बता दिया कि हिन्दी फ़िल्मों में ख़ासकर यथार्थवादी सिनेमा में एक नया नाम स्मिता पाटिल के रूप में जुड़ गया है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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