सरोज ख़ान  

सरोज ख़ान
सरोज ख़ान
पूरा नाम सरोज ख़ान
अन्य नाम निर्मला नागपाल (मूल नाम)
जन्म 22 नवंबर, 1948
जन्म भूमि मुम्बई, महाराष्ट्र
मृत्यु 3 जुलाई, 2020
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
अभिभावक पिता- किशनचंद सद्धू सिंह, माता- नोनी सद्धू सिंह
पति/पत्नी बी. सोहनलाल, सरदार रोशन ख़ान
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय सिनेमा
मुख्य फ़िल्में सरोज ख़ान ने फिल्म 'तेज़ाब', 'ख़लनायक', 'मिस्टर इंडिया', 'चालबाज़', 'नगीना', 'चांदनी', 'हम दिल दे चुके सनम', 'देवदास' जैसी कई मशहूर फ़िल्मों के गानों को कोरियोग्राफ़ किया।
प्रसिद्धि कोरियोग्राफ़र
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सरोज ख़ान को सफलता फ़िल्म 'मिस्टर इंडिया' में श्रीदेवी के ऊपर फिल्माए गए गाने 'हवा-हवाई' से मिली। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सरोज ख़ान (अंग्रेज़ी: Saroj Khan, जन्म- 22 नवंबर, 1948; मृत्यु- 3 जुलाई, 2020) प्रसिद्ध भारतीय कोरियोग्राफ़र थीं। उन्होंने अपने कॅरियर में 200 से भी अधिक फ़िल्मों में काम किया। चार दशक के लंबे कॅरियर में सरोज ख़ान को 2,000 से ज़्यादा गानों की कोरियोग्राफ़ी करने का श्रेय हासिल है। सरोज ख़ान को अपनी कोरियोग्राफ़ी की कला के कारण तीन बार "नेशनल अवॉर्ड" मिल चुका था। संजय लीला भंसाली की फ़िल्म 'देवदास' में 'डोला-रे-डोला' गाने की कोरियोग्राफ़ी के लिए उन्हें 'नेशनल अवॉर्ड' मिला।


सरोज ख़ान ने आख़िरी बार करण जौहर के प्रोडक्शन हाउस के तले बनी फिल्म 'कलंक' में 'तबाह हो गए' गाने को कोरियोग्राफ़ किया था। इस गाने में माधुरी दीक्षित नज़र आई थीं। यह फ़िल्म 2019 में रिलीज़ हुई थी। माधुरी दीक्षित की फिल्म 'तेज़ाब' के यादगार आइटम गीत 'एक-दो-तीन' और साल 2007 में आई फिल्म 'जब वी मेट' के गीत 'ये इश्क...' के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था।

परिचय

सरोज ख़ान का जन्म 22 नवंबर, 1948 को मुम्बई, महाराष्ट्र में किशनचंद सद्धू सिंह और नोनी सद्धू सिंह के घर हुआ था। सरोज ख़ान ने 200 से ज्यादा फ़िल्मों के लिए कोरियोग्राफ़ी की। निर्मला के तौर पर जन्म होने के बाद सरोज ख़ान का परिवार विभाजन के बाद भारत आ गया था। उन्होंने बाल कलाकार के रूप में अपने कॅरियर की शुरुआत तीन साल की उम्र में की थी। पहली बार वह 'नज़राना' फ़िल्म में श्यामा के रूप में नज़र आई थीं। इसके बाद 1950 के दशक में वह बैकग्राउंड डासंर का काम करती रहीं।

सरोज ख़ान ने 13 साल की उम्र में बी. सोहनलाल से विवाह कर लिया था, जो पहले से शादीशुदा थे। सरोज ख़ान ने अपनी शादी के बारे में एक इंटरव्यू में बताया था कि- "जब मेरी शादी हुई उस वक्त मैं स्कूल जाया करती थी। मुझे नहीं पता था कि शादी के मायने क्या होते हैं। एक दिन मास्टर सोहनलाल ने उनके गले में एक धागा बांध दिया। उन्हें लगा कि उनकी शादी हो गई है। शादी में काफी परेशानियां आई थीं। सरोज ख़ान को पता नहीं था कि उनके पति पहले से ही शादीशुदा हैं। बेटे राजू खान के जन्म के बाद उन्हें इस बारे में पता चला। उस समय वह 14 साल की थीं। साल 1965 में उन्होंने दूसरे बच्चे को जन्म दिया। उसकी आठ महीने बाद ही मृत्यु हो गई। सरोज ख़ान के बच्चों को उनके पति ने नाम देने से इंकार कर दिया। इस कारण दोनों अलग हो गए। हालांकि सोहन के हार्ट अटैक आने के बाद दोनों फिर एक हुए। इस दौरान उनकी बेटी कुकु का जन्म हुआ। सरोज ख़ान ने दोनों की परवरिश अकेले की थी।

उन्होंने अपने पति से ही नृत्य सीखा। उनके पति बी. सोहनलाल कथक, मणिपुरी, कथकली, भरतनाट्यम आदि शास्त्रीय नृत्यों के उस्ताद थे। इसके बाद सरोज ख़ान ख़ुद कोरियाग्राफ़र बनने के लिए चल पड़ीं। शादी के कुछ सालों बाद ही इन दोनों के रिश्ते में परेशानियाँ आने लगी और बी. सोहनलाल सरोज ख़ान को हमेशा के लिए छोड़कर मद्रास चले गए। सरोज ख़ान ने सरदार रोशन ख़ान से दूसरी शादी की और एक बेटी को जन्म दिया। फ़िलहाल उनकी बेटी दुबई में डांस स्कूल चलाती है। रोशन ख़ान मुस्लिम हैं, इस वजह से सरोज ख़ान ने भी इस्लाम धर्म अपना लिया।

मशहूर कोरियोग्राफ़र रहीं सरोज ख़ान ने एक बार पाकिस्तानी टीवी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि- "मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम को कुबूला था और वह आज तक मुस्लिम धर्म का पालन करती हैं।"

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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