मुंडेश्वरी मंदिर  

मुंडेश्वरी मंदिर
मुंडेश्वरी मंदिर
विवरण मुंडेश्वरी मंदिर बिहार के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह भारत के सर्वाधिक प्राचीन व सुंदर मंदिरों में एक है।
राज्य बिहार
ज़िला कैमूर
निर्माता उदय सेन
स्वामित्व बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद
निर्माण काल 635-636 ई.
भौगोलिक स्थिति बिहार के कैमूर ज़िले के भगवानपुर अंचल में पवरा पहाड़ी पर 608 फीट की ऊँचाई पर।
रेलवे स्टेशन कुदरा स्‍टेशन
यातायात बस, ऑटो, जीप आदि।
अन्य जानकारी मुंडेश्वरी मंदिर की प्राचीनता का महत्व इस दृष्टि से और भी अधिक है कि यहाँ पर पूजा की परंपरा 1900 सालों से अविच्छिन्न चली आ रही है और आज भी यह मंदिर पूरी तरह जीवंत है।

मुंडेश्वरी मंदिर बिहार के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर बिहार के कैमूर ज़िले के भगवानपुर अंचल में पवरा पहाड़ी पर 608 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह प्राचीन मंदिर पुरातात्विक धरोहर ही नहीं, अपितु तीर्थाटन व पर्यटन का जीवंत केन्‍द्र भी है। इस मंदिर को कब और किसने बनाया, यह दावे के साथ कहना कठिन है, लेकिन यहाँ से प्राप्त शिलालेख के अनुसार माना जाता है कि उदय सेन नामक क्षत्रप के शासन काल में इसका निर्माण हुआ। इसमें कोई सन्देह नहीं कि यह मंदिर भारत के सर्वाधिक प्राचीन व सुंदर मंदिरों में एक है। भारत के 'पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग' द्वारा संरक्षित मुंडेश्वरी मंदिर के पुरुत्थान के लिए योजनायें बनाई जा रही है और इसके साथ ही इसे यूनेस्को की लिस्ट में भी शामिल करवाने के प्रयास जारी हैं।

प्राचीनता

मुंडेश्वरी मंदिर की प्राचीनता का महत्व इस दृष्टि से और भी अधिक है कि यहाँ पर पूजा की परंपरा 1900 सालों से अविच्छिन्न चली आ रही है और आज भी यह मंदिर पूरी तरह जीवंत है। बड़ी संख्या में भक्तों का यहाँ आना-जाना लगा रहता है। यह मंदिर भारत का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। मंदिर परिसर में विद्यमान शिलालेखों से इसकी ऐतिहासिकता प्रमाणित होती है। 1838 से 1904 ई. के बीच कई ब्रिटिश विद्वान् व पर्यटक यहाँ आए थे। प्रसिद्ध इतिहासकार फ्राँसिस बुकनन भी यहाँ आये थे। मंदिर का एक शिलालेख कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में है। पुरातत्वविदों के अनुसार यह शिलालेख 349 ई. से 636 ई. के बीच का है।

इस मंदिर का उल्लेख कनिंघम ने भी अपनी पुस्तक में किया है। उसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कैमूर में मुंडेश्वरी पहाड़ी है, जहाँ मंदिर ध्वस्त रूप में विद्यमान है। इस मंदिर का पता तब चला, जब कुछ गडरिये पहाड़ी के ऊपर गए और मंदिर के स्वरूप को देखा। उस समय इसकी इतनी ख्याति नहीं थी, जितनी अब है। प्रारम्भ में पहाड़ी के नीचे निवास करने वाले लोग ही इस मंदिर में दीया जलाते और पूजा-अर्चना करते थे। यहाँ से प्राप्त शिलालेख में वर्णित तथ्‍यों के आधार पर कुछ लोगों द्वारा यह अनुमान लगाया जाता है कि यह आरंभ में वैष्णव मंदिर रहा होगा, जो बाद में शैव मंदिर हो गया तथा उत्‍तर मध्‍ययुग में शाक्‍त विचारधारा के प्रभाव से शक्तिपीठ के रूप में परिणित हो गया। मंदिर की प्राचीनता का आभास यहाँ मिले महाराजा दुत्‍तगामनी की मुद्रा से भी होता है, जो बौद्ध साहित्य के अनुसार अनुराधापुर वंश का था और ईसा पूर्व 101-77 में श्रीलंका का शासक रहा था।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 भारत का प्राचीनतम मुंडेश्वरी मंदिर (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 25 मई, 2013।
  2. माँ मुंडेश्वरी देवी (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 25 मई, 2013।
  3. मुंडेश्वरी मंदिर (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 25 मई, 2013।

बाहरी कड़ियाँ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=मुंडेश्वरी_मंदिर&oldid=601200" से लिया गया