Notice: Undefined offset: 0 in /home/bharat/public_html/gitClones/live-development/bootstrapm/Bootstrapmskin.skin.php on line 41
अमरावती (राजधानी) - भारतकोश, ज्ञान का हिन्दी महासागर

अमरावती (राजधानी)  

Disamb2.jpg अमरावती एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- अमरावती (बहुविकल्पी)
अमरावती (राजधानी)
गौतम बुद्ध, अमरावती
विवरण आंध्र प्रदेश राज्य की प्रस्तावित राजधानी है। गुंटूर ज़िले में कृष्णा नदी के दाहिने तट पर स्थित यह नगर सातवाहन राजाओं के शासनकाल में हिन्दू संस्कृति का केन्द्र था।
राज्य आंध्र प्रदेश
ज़िला गुंटूर
भौगोलिक स्थिति 16° 32′ 27.6″ उत्तर, 80° 30′ 54″ पूर्व
संबंधित लेख हैदराबाद, तेलंगाना
आधिकारिक भाषा तेलुगु
वाहन पंजीयन संख्या AP-07
अन्य जानकारी बुद्ध की मूर्तियों को मानव आकृति के बजाय प्रतीकों के द्वारा गढ़ा गया है, जिससे पता चलता है कि अमरावती शैली, मथुरा शैली और गान्धार शैली से पुरानी है। यह यूनानी प्रभाव से पूर्णतया मुक्त थी।
अद्यतन‎

अमरावती (अंग्रेज़ी: Amaravati) आंध्र प्रदेश राज्य की प्रस्तावित राजधानी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उदंडरायण पालम इलाके में 22 अक्टूबर 2015 को नींव का पत्थर रखा था। गुंटूर और विजयवाड़ा का महानगरीय क्षेत्र मिला कर अमरावती महानगर क्षेत्र का निर्माण किया जायेगा। यह आन्ध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले में कृष्णा नदी के दाहिने तट पर स्थित यह नगर सातवाहन राजाओं के शासनकाल में हिन्दू संस्कृति का केन्द्र था। इसका प्राचीन नाम धान्यघट या धान्यकटक अथवा धरणिकोट है। कृष्णा नदी के तट पर बसे होने से इस स्थान का बड़ा महत्त्व था क्योंकि समुद्र से कृष्णा नदी से होकर व्यापारिक जहाज़ यहाँ पहुँचते थे। यहाँ से भारी मात्रा में आहत सिक्के (पंच मार्क्ड) जो सबसे पुराने हैं, मिले हैं।

इतिहास

धम्मपद अट्ठकथा में उल्लेख है कि बुद्ध अपने किसी पूर्व जन्म में सुमेध नामक एक ब्राह्मण कुमार के रूप में इस नगर में पैदा हुए थे। अशोक की मृत्यु के बाद से तक़रीबन चार शताब्दियों तक दक्षिण भारत में सातवाहनों का शासन रहा। आंध्रवंशीय सातवाहन नरेश शातकर्णि प्रथम ने लगभग 180 ई.पू. अमरावती को अपनी राजधानी बनाया। सातवाहन नरेश ब्राह्मण होते हुए भी महायान मत के पोषक थे और उन्हीं के शासनकाल में अमरावती का प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप बना, जो तेरहवीं शताब्दी तक बौद्ध यात्रियों के आकर्षण का केन्द्र बना रहा। मूल स्तूप घण्टाकार था। स्तूप की ऊँचाई सौ फुट थी। आधार से शिखर तक तक्षित शिला-पट्ट लगाये गये थे। इस प्रकार का अलंकरण अन्यत्र नहीं मिलता। चीनी यात्री युवानच्वांग ने उस स्थान के बारे लिखा था कि बैक्ट्रिया के समस्त भवनों की शान-शौक़त इसमें निहित थी। बुद्ध के जीवन की कथाओं के दृश्य उन पर उत्कीर्ण थे। अमरावती स्तूप लगभग द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में कर्नल कालिन मैकेंजी ने ही सर्वप्रथम इस स्तूप का पता लगाया था।

प्राचीन आंध्र की राजधानी

कृष्णा नदी के तट पर अवस्थित, प्राचीन आंध्र की राजधानी है। आंध्र वंश सातवाहन नरेश शातकर्णी ने संभवत 180 ईस्वी पूर्व के लगभग इस स्थान पर अपनी राजधानी स्थापित की थी। सातवाहन नरेश ब्राह्मण होते हुए भी बौद्ध हीनयान मत के पोषक थे और उन्हीं के शासनकाल में अमरावती का प्रख्यात बौद्ध स्तूप बना था जो 13वीं सदी तक अनेक बौद्ध अनुयायियों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस स्तूप की वास्तुकला और मूर्तिकारी माची और भरहुत की कला के समान ही सुंदर सरल और परमोत्कृष्ट है और संसार की धार्मिक मूर्तिकला में उसका विशिष्ट स्थान माना जाता है। बुद्ध के जीवन की कथाओं के चित्र दो मूर्तियों के रूप में प्रदर्शित हैं, यहां के स्तूप पर सैकड़ों की संख्या में उत्कीर्ण थे। अब यह स्तूप भी नष्ट हो गया है किंतु उसकी मूर्तिकारी के अवशेष संग्रहालय में सुरक्षित हैं। धाय कटक की निकटवर्ती पहाड़ियों एवं श्रीपर्वत या नागार्जुनीकोड नामक स्थान था, जहां बौद्ध दार्शनिक नागार्जुन काफी समय तक रहे थे। आंध्र वंश के पश्चात अमरावती में कई सदियों तक इक्ष्वाकु राजाओं का शासन रहा। उन्होंने इस नगरी को छोड़ कर नागार्जुनीकोड विजयपुर को अपनी राजधानी बनाया। अमरावती अपने समृद्धि काल में प्रसिद्ध व्यापारिक नगरी थी। समुद्र से कृष्णा नदी होकर अनेक व्यापारिक जलयान यहाँ पहुंचते थे। वास्तव में इसकी समृद्धि तथा कला का एक कारण इस का व्यापार भी था।[1]

तेलंगाना के अलग होने के बाद

सातवाहन काल में यह प्रसिद्ध सांस्कृतिक एवं आर्थिक केंद्र था। तेलंगाना के अलग हो जाने से हैदराबाद अब तेलंगाना की राजधानी है। इसलिए आंध्र प्रदेश के द्वारा अमरावती को अपनी राजधानी बनाया गया है। ‘हमारी मिट्टी, हमारा जल और हमारी अमरावती’ के नारे के साथ अमरावती को ‘पीपुल्स कैपिटल’ (जन की राजधानी) नाम दिया गया है। अमरावती को सिंगापुर की तर्ज पर बनाया जा रहा है। नई राजधानी में नवरत्न का कॉन्सेप्ट रखा गया है। इसके तहत नॉलेज सिटी, फाइनेंसियल सिटी, हेल्थ सिटी, इलेक्ट्रॉनिक सिटी, जस्टिस सिटी, टूरिज्म सिटी, गवर्नमेंट सिटी, स्पोर्ट्स सिटी एवं एजुकेशनल सिटी बनाने की कोशिश होगी। भारत में पहली बार किसी राज्य की राजधानी को पूर्व नियोजित तरीके से विकसित किया जा रहा है, यह एक अति महत्त्वाकांक्षी योजना है। केंद्र सरकार ने भी आंध्र प्रदेश को हर संभव मदद देने की घोषणा की है। इस योजना के जरिए ऐतिहासिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के बावजूद नजरंदाज हुए इस शहर को दुनिया में नई पहचान मिलेगी।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पुस्तक- ऐतिहासिक स्थानावली | पृष्ठ संख्या- 31| लेखक- विजयेन्द्र कुमार माथुर | प्रकाशन- वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग | मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार
  2. अमरावती आंध्र प्रदेश की नई राजधानी (हिंदी) www.ssgcp.com। अभिगमन तिथि: 13 अक्टूबर, 2017।

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=अमरावती_(राजधानी)&oldid=627286" से लिया गया