डेंगू  

कारण

यह "डेंगू" वायरस द्वारा होता है इसे "डेन वायरस" भी कहते हैं। डेंगू वायरस चार मुख्य प्रकार के होते हैं, जैसे कि डेन-1, डेन-2, डेन-3 और डेन-4 (DEN-1, DEN-2, DEN-3, DEN-4)। ये फ्लैवि वायरस गण तथा फ्लेविविराइड परिवार के होते हैं, बहुधा उन्हीं क्षेत्रों में फैलता है जिनमें मलेरिया फैलता है, किंतु मलेरिया से पृथकता यह है कि यह शहरी क्षेत्र में फैलता है जिनमें सिंगापुर, ताइवान, इण्डोनेशिया, फिलीपींस, भारत तथा ब्राज़ील भी शामिल है, प्रत्येक विषाणु इतना भिन्न होता है किसी एक से संक्रमण के बाद भी अन्य के विरुद्ध सुरक्षा नहीं मिलती है, तथा जहाँ यह महामारी रूप में फैलता है वहाँ एक समय में अनेक प्रकार के विषाणु सक्रिय हो सकते हैं, ये उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में तथा अफ़्रीका में मिलते हैं, ये चार प्रकार के निकटता से जुड़े [विषाणु]] से होते हैं। डेंगू बुख़ार से पीड़ित रोगी के रक्त में डेंगू वायरस काफ़ी मात्रा में होता है। डेंगू बुख़ार से पीड़ित रोगी के रक्त में डेंगू विषाणु प्रवेश कर प्लेटलेट पर आक्रमण करता है। प्लेटलेट शरीर में रक्तस्राव रोकने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। शरीर में प्लेटलेट की संख्या चिंताजनक स्तर तक गिर जाती है। इससे असामान्य रक्तस्राव हो सकता है, जो कि चमड़ी, आमाशय, आंत्रों और शरीर के अन्य रन्ध्रों से होता है। एक छोटी चोट लगने पर भी बहुत तेज़ रक्तस्राव होने लगता है, क्योंकि रक्त क्लॉट (जमने) नहीं हो पाता।[4]

डेंगू का वाहक 'एडीज एजिपटाई'

प्रसार

मलेरिया की तरह डेंगू बुख़ार भी मच्छरों के काटने से फैलता है। डेंगू सभी मच्छर से नहीं फैलता है। यह केवल कुछ जाति के मच्छर से फैलता है। इस रोग का वाहक एड़ीज मच्छर की दो प्रजातियां हैं- एडीज एजिपटाई (Aedes aegypti) तथा एडीज एल्बोपेक्टस के नाम से जाने जाते हैं। जो काफ़ी ढीठ व और दुस्साहसी मच्छर हैं और दिन में भी काटते हैं। मच्छर के शरीर में एक बार वायरस के पहुंचने के पश्चात् यह पूरी ज़िन्दगी बीमारी फैलाने में समक्ष होता है। डेंगू बुख़ार उस मच्छर के काटने से होता है जिसने पहले से ही किसी डेंगू के मरीज़ को काटा है। यह मच्छर बरसात के मौसम में ज़्यादा फैलते हैं और यह उन जगहों पर तेज़ी से फैलते हैं जहाँ पानी जमा हो। डेंगू का वायरस स्वाइन फ्लू की तरह संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं फैलता। यह मच्छर के माध्यम से ही फैलता है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता, अगर किसी को डेंगू की बीमारी है, और एडीज मच्छर उस मरीज़ से ख़ून पीता है, तो मच्छर में डेंगू वायरस युक्त ख़ून चला जाता है। फिर जब एक सप्ताह में किसी स्वस्थ व्यक्ति को यह मच्छर काटता है, तो डेंगू का वायरस उसमें चला जाता है। मच्छर को वेक्टर (vector) कहते हैं और इस प्रकार से फैलने वाले बीमारी को वेक्टर बोर्न डिसईज़ (vector borne disease) कहते हैं। डेंगू उन लोगों को जल्दी प्रभावित करता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। यह भी हो सकता है कि डेंगू बुख़ार एक ही व्यक्ति को कई बार हो जाये। लेकिन ऐसी स्‍थिति में बुख़ार के प्रकार भिन्न होंगे।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. DEN-1, DEN-2, DEN-3, DEN-4
  2. Aedes aegypti
  3. डेंगू बुखार : एक संक्रामक रोग (बचाव) (हिन्दी) (ए.एस.पी) नारद समाचार। अभिगमन तिथि: 9 मार्च, 2011
  4. डेंगू या डेंगी (हिन्दी) (पी.एच.पी) निरोग। अभिगमन तिथि: 9 मार्च, 2011
  5. ये मच्छर जानलेवा है (हिन्दी) (पी.एच.पी) देशबन्धु। अभिगमन तिथि: 9 मार्च, 2011

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