"चित्तौड़गढ़ क़िला": अवतरणों में अंतर
गोविन्द राम (वार्ता | योगदान) छो (श्रेणी:भारत के क़िले; Adding category Category:भारत के दुर्ग (को हटा दिया गया हैं।)) |
गोविन्द राम (वार्ता | योगदान) No edit summary |
||
पंक्ति 1: | पंक्ति 1: | ||
[[चित्र:Chittorgarh-Fort-8.jpg|thumb|250px|चित्तौड़गढ़ क़िला]] | |||
*चित्तौड़गढ़ क़िला, [[उदयपुर]] ज़िले ([[राजस्थान]]) के प्राचीन नगर [[चित्तौड़गढ़]] में स्थित है। | *चित्तौड़गढ़ क़िला, [[उदयपुर]] ज़िले ([[राजस्थान]]) के प्राचीन नगर [[चित्तौड़गढ़]] में स्थित है। | ||
==इतिहास== | ==इतिहास== | ||
किंवदंती है कि प्राचीन गढ़ को [[महाभारत]] के [[भीम (पांडव)|भीम]] ने बनवाया था। भीम के नाम पर भीमगोड़ी, भीमसत आदि कई स्थान आज भी क़िले के भीतर हैं। पीछे [[मौर्य वंश]] के राजा मानसिंह ने [[उदयपुर]] के महाराजाओं के पूर्वज बघा रावल को जो उनका भानजा था, यह क़िला सौंप दिया। यहीं बप्पारावल ने मेवाड़ के नरेशों की राजधानी बनाई, जो 16वीं शती में उदयपुर के बसने तक इसी रूप में रही। 1303 ई. में सुलतान [[अलाउद्दीन ख़िलज़ी]] ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। इस अवसर पर महारानी [[पद्मिनी]] तथा अन्य वीरांगनाएँ अपने कुल के सम्मान तथा भारतीय नारीत्व की लाज रखने के लिए अग्नि में कूदकर भस्म हो गईं और राजपूत वीरों ने युद्ध में प्राण उत्सर्ग कर दिए। जिस स्थान पर रानी पद्मिनी सती हुई थीं वह समाधीश्वर नाम से विख्यात है। स्थानीय जनश्रुति के आधार पर कहा जाता है कि अलाउद्दीन ने चित्तौड़ पर दो आक्रमण किए थे, किन्तु आधुनिक खोजों से एक ही आक्रमण सिद्ध होता है। रानी पद्मिनी के महल नामक प्रासाद के खंडहर भी क़िले के अन्दर ही अवस्थित हैं। [ | किंवदंती है कि प्राचीन गढ़ को [[महाभारत]] के [[भीम (पांडव)|भीम]] ने बनवाया था। भीम के नाम पर भीमगोड़ी, भीमसत आदि कई स्थान आज भी क़िले के भीतर हैं। पीछे [[मौर्य वंश]] के राजा मानसिंह ने [[उदयपुर]] के महाराजाओं के पूर्वज बघा रावल को जो उनका भानजा था, यह क़िला सौंप दिया। यहीं बप्पारावल ने मेवाड़ के नरेशों की राजधानी बनाई, जो 16वीं शती में उदयपुर के बसने तक इसी रूप में रही। 1303 ई. में सुलतान [[अलाउद्दीन ख़िलज़ी]] ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। इस अवसर पर महारानी [[पद्मिनी]] तथा अन्य वीरांगनाएँ अपने कुल के सम्मान तथा भारतीय नारीत्व की लाज रखने के लिए अग्नि में कूदकर भस्म हो गईं और राजपूत वीरों ने युद्ध में प्राण उत्सर्ग कर दिए। जिस स्थान पर रानी पद्मिनी सती हुई थीं वह समाधीश्वर नाम से विख्यात है। स्थानीय जनश्रुति के आधार पर कहा जाता है कि अलाउद्दीन ने चित्तौड़ पर दो आक्रमण किए थे, किन्तु आधुनिक खोजों से एक ही आक्रमण सिद्ध होता है। रानी पद्मिनी के महल नामक प्रासाद के खंडहर भी क़िले के अन्दर ही अवस्थित हैं। [इस भवन को 1535 ई. में [[गुजरात]] के सुलतान बहादुरशाह ने नष्ट कर दिया था। गुजरात के सुलतान बहादुरशाह (1405-1442ई.) ने चित्तौड़ विजय से लौटते समय [[चन्द्रावती]] को आँखों से देखकर इसका चित्रण अपनी पुस्तक 'ट्रेवल्स इन वेस्टर्न इण्डिया' में किया है। चित्तौड़ का दूसरा 'साका' या जौहर गुजरात के सुलतान बहादुरशाह के मेवाड़ पर आक्रमण के समय हुआ। इस अवसर पर महारानी कर्णावती ने [[हुमायूँ]] को राखी भेजकर उसे अपना राखीबंद भाई बनाया था। चित्तौड़ के निकट ही [[पिंडौली]] नामक ग्राम है, जहाँ अकबर और मेवाड़ की सेना में युद्ध हुआ था। तीसरा 'साका' अकबर के समय में हुआ, जिसमें वीर जयमल और पत्ता ने मेवाड़ की रक्षा के लिए हँसते-हँसते प्राणदान किया था। [[अकबर]] के समय में ही महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर नामक नगर को बसाकर मेवाड़ की नई राजधानी वहाँ बनाई। चित्तौड़ के क़िले के अन्दर आठ विशाल सरोवर हैं। प्रसिद्ध भक्त कवयित्री [[मीराबाई]] (जन्म 1498 ई.) का भी यहाँ मन्दिर है, जिसे बहादुरशाह ने तोड़ डाला था। | ||
=वीथिका= | |||
<gallery width="200" perrow="3"> | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-11.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-7.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-13.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-6.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-4.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-14.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-15.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
चित्र:Chittorgarh-Fort-10.jpg|चित्तौड़गढ़ क़िला, [[चित्तौड़गढ़]] | |||
</gallery> | |||
{{प्रचार}} | {{प्रचार}} | ||
पंक्ति 17: | पंक्ति 30: | ||
<references/> | <references/> | ||
==संबंधित लेख== | ==संबंधित लेख== | ||
{{भारत के | {{भारत के दुर्ग}} | ||
{{राजस्थान के पर्यटन स्थल}} | {{राजस्थान के पर्यटन स्थल}} | ||
[[Category:राजस्थान]] | [[Category:राजस्थान]] | ||
[[Category:राजस्थान के ऐतिहासिक नगर]] | [[Category:राजस्थान के ऐतिहासिक नगर]] | ||
[[Category:राजस्थान के पर्यटन स्थल]] | [[Category:राजस्थान के पर्यटन स्थल]] | ||
[[Category:भारत के दुर्ग]] | |||
[[Category:स्थापत्य कला]] | [[Category:स्थापत्य कला]] | ||
[[Category:कला कोश]] | [[Category:कला कोश]] | ||
[[Category:पर्यटन कोश]] | [[Category:पर्यटन कोश]] | ||
__INDEX__ | __INDEX__ | ||
__NOTOC__ | __NOTOC__ |
14:19, 25 अप्रैल 2011 का अवतरण

- चित्तौड़गढ़ क़िला, उदयपुर ज़िले (राजस्थान) के प्राचीन नगर चित्तौड़गढ़ में स्थित है।
इतिहास
किंवदंती है कि प्राचीन गढ़ को महाभारत के भीम ने बनवाया था। भीम के नाम पर भीमगोड़ी, भीमसत आदि कई स्थान आज भी क़िले के भीतर हैं। पीछे मौर्य वंश के राजा मानसिंह ने उदयपुर के महाराजाओं के पूर्वज बघा रावल को जो उनका भानजा था, यह क़िला सौंप दिया। यहीं बप्पारावल ने मेवाड़ के नरेशों की राजधानी बनाई, जो 16वीं शती में उदयपुर के बसने तक इसी रूप में रही। 1303 ई. में सुलतान अलाउद्दीन ख़िलज़ी ने चित्तौड़ पर आक्रमण किया। इस अवसर पर महारानी पद्मिनी तथा अन्य वीरांगनाएँ अपने कुल के सम्मान तथा भारतीय नारीत्व की लाज रखने के लिए अग्नि में कूदकर भस्म हो गईं और राजपूत वीरों ने युद्ध में प्राण उत्सर्ग कर दिए। जिस स्थान पर रानी पद्मिनी सती हुई थीं वह समाधीश्वर नाम से विख्यात है। स्थानीय जनश्रुति के आधार पर कहा जाता है कि अलाउद्दीन ने चित्तौड़ पर दो आक्रमण किए थे, किन्तु आधुनिक खोजों से एक ही आक्रमण सिद्ध होता है। रानी पद्मिनी के महल नामक प्रासाद के खंडहर भी क़िले के अन्दर ही अवस्थित हैं। [इस भवन को 1535 ई. में गुजरात के सुलतान बहादुरशाह ने नष्ट कर दिया था। गुजरात के सुलतान बहादुरशाह (1405-1442ई.) ने चित्तौड़ विजय से लौटते समय चन्द्रावती को आँखों से देखकर इसका चित्रण अपनी पुस्तक 'ट्रेवल्स इन वेस्टर्न इण्डिया' में किया है। चित्तौड़ का दूसरा 'साका' या जौहर गुजरात के सुलतान बहादुरशाह के मेवाड़ पर आक्रमण के समय हुआ। इस अवसर पर महारानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेजकर उसे अपना राखीबंद भाई बनाया था। चित्तौड़ के निकट ही पिंडौली नामक ग्राम है, जहाँ अकबर और मेवाड़ की सेना में युद्ध हुआ था। तीसरा 'साका' अकबर के समय में हुआ, जिसमें वीर जयमल और पत्ता ने मेवाड़ की रक्षा के लिए हँसते-हँसते प्राणदान किया था। अकबर के समय में ही महाराणा उदयसिंह ने उदयपुर नामक नगर को बसाकर मेवाड़ की नई राजधानी वहाँ बनाई। चित्तौड़ के क़िले के अन्दर आठ विशाल सरोवर हैं। प्रसिद्ध भक्त कवयित्री मीराबाई (जन्म 1498 ई.) का भी यहाँ मन्दिर है, जिसे बहादुरशाह ने तोड़ डाला था।
वीथिका
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
-
चित्तौड़गढ़ क़िला, चित्तौड़गढ़
|
|
|
|
|
टीका टिप्पणी और संदर्भ
संबंधित लेख