महावीर के पाँच नाम  

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के मूर्तिमान प्रतीक थे। उनका जीवन त्याग और तपस्या से ओतप्रोत था। एक लँगोटी तक का परिग्रह नहीं था उन्हें। हिंसा, पशुबलि, जाति-पाँति के भेदभाव जिस युग में बढ़ गए, उसी युग में पैदा हुए महावीर और बुद्ध। दोनों ने इन चीजों के खिलाफ आवाज उठाई। दोनों ने अहिंसा का भरपूर विकास किया। महावीर के पाँच नाम निम्न प्रकार हैं-

  1. वीर - जन्माभिषेक के समय इन्द्र को शंका हुई कि बालक इतने जल प्रवाह को कैसे सहन करेगा। बालक ने अवधि ज्ञान से जानकर पैर के अंगूठे से मेरु पर्वत को थोड़ा-सा दबाया, तब इन्द्र को ज्ञात हुआ इनके पास बहुत बल है। इन्द्र ने क्षमा माँगी एवं कहा कि ये तो 'वीर' जिनेन्द्र हैं।
  2. वर्द्धमान - राजा सिद्धार्थ ने कहा जब से बालक प्रियकारिणी के गर्भ में आया, उसी दिन से घर, नगर और राज्य में धन-धान्य की समृद्धि प्रारम्भ हो गई। अत: इस बालक का नाम 'वर्द्धमान' रखा जाए।
  3. सन्मति - एक समय संजय और विजय नाम के दो चारण ऋद्धिधारी मुनियों को तत्व सम्बन्धी कुछ जिज्ञासा थी। वर्द्धमान पर दृष्टि पड़ते ही उनकी जिज्ञासा का समाधान हो गया। तब मुनियों ने वर्द्धमान का नाम 'सन्मति' रखा।
  4. महावीर - वर्द्धमान मित्रों के साथ एक वृक्ष पर क्रीड़ा कर रहे थे। तब संगमदेव ने भयभीत करने के लिए एक विशाल सर्प का रूप धारण कर वृक्ष के तने से लिपट गये। सब मित्र डर गए, डाली से कूदे और भाग गए, किन्तु वर्द्धमान सर्प के ऊपर चढ़कर ही उससे क्रीड़ा करने लगे। ऐसा देख संगमदेव ने अपने रूप में आकर वर्द्धमान की प्रशंसा कर 'महावीर' नाम दिया।
  5. अतिवीर - एक हाथी मदोन्मत्त हो किसी के वश में नहीं हो रहा था। उत्पात मचा रहा था। महावीर को ज्ञात हुआ तो वे जाने लगे, तब लोगों ने मना किया, किन्तु वे नहीं माने और चले गए। हाथी महावीर को देख नतमस्तक हो सूंड उठाकर नमस्कार करने लगा। तब जनसमूह ने कुमार की प्रशंसा की और उनका नाम 'अतिवीर' रख दिया।[1]
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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. तीर्थंकर महावीर के पाँच नाम (हिंदी) acharyagyansagar.in। अभिगमन तिथि: 17 मई, 2020।

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