अलग़ज़ाली  

अलग़ज़ाली

अलग़ज़ाली (1058-1111 ई.) संसार के उन प्रसिद्ध व्यक्तियों में से एक हैं, जिनकी योग्यता और ज्ञान का लोहा उनके जीवन काल में ही सबने मान लिया था। इमाम ग़ज़ाली साहब अन्य विद्वानों की तरह किसी एक विद्या के नहीं, बल्कि एक ही साथ कई विद्याओं के ज्ञाता थे। वे विद्वान् भी थे और दार्शनिक भी, सूफ़ी भी थे और धर्म मीमांसक भी, मुतकल्लिम (वाद-विद्यानुयायी) भी थे और विचारक भी। परन्तु इमाम साहब का बड़प्पन इस बात में है कि वे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने सच्चाई की खोज में सारे विश्व का चक्कर लगाया, कठिनाईयाँ झेलीं और उस समय की समस्त विद्याओं और शिक्षाओं का नये सिरे से अध्ययन किया तथा अन्त में उस सच्चाई को प्राप्त करने में सफल हुए, जिसकी तलाश के लिए उन्होंने अध्यापन कार्य छोड़ा और अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।

जीवन परिचय

इमाम साहब, जिनका नाम मुहम्मद, जाति हुजज्तुलइस्लाम और ग़ज़ाली उपनाम है, पंद्रहवी शताब्दी के मध्य में ख़ुरासान प्रदेश के ज़िला तूस में पैदा हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि इनका जन्म एक गांव में हुआ था, जिसका नाम 'ग़ज़ाला' था और इसी कारण बाद में आप ग़ज़ाली के नाम से जाने गए। परन्तु ऐसा भी कहा जाता है कि ग़ज़ाली के पिता ऊन कातकर बेचा करते थे और कातने को अरबी भाषा में 'ग़ज़ल' कहते हैं, इस कारण इनका नाम ग़ज़ाली पड़ा।

ग़ज़ाली के पिता एक धार्मिक और नेकदिल व्यक्ति थे। उन्होंने ख़ुदा से प्रार्थना की कि ऐ ख़ुदा मुझे एक ऐसा बेटा दे, जो विद्वान् बने। ख़ुदा ने उसकी प्रार्थना स्वीकार की और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम मुहम्मद रखा गया, जो बाद में इमाम ग़ज़ाली के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसी प्रकार उसके पिता ने फिर प्रार्थना की कि ऐ ख़ुदा ऐसा लड़का दे, जो धर्मोपदेशक बने। ख़ुदा की दयालुता देखिए कि उन्हें फिर पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम अहमद रखा गया और बाद में एक महान् धर्मोपदेशक बना। अभी ये भाई छोटे ही थे कि उनके पिता का निधन हो गया। मरने से पहले उन्होंने अपने दोनों बच्चों को अपने एक दोस्त को सौंप दिया और पैसा देकर बच्चों का शिक्षा प्रबन्ध करने के लिए कहा। दोस्त ने बच्चों को शिक्षा दिलानी शुरू कर दी। कुछ दिनों के पश्चात् जब उसके पिता की दी हुई सम्पत्ति समाप्त हो गई, तब उस दोस्त ने उनको एक विद्यालय में प्रविष्ट करा दिया, जहाँ वे खैरात की रोटी पर बसर करके अपनी पढ़ाई में प्रतृत्त हो गए।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

विश्व के प्रमुख दार्शनिक |लेखक: श्री एस.एच. अमानतुल्लाह |प्रकाशक: वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली, 684 |पृष्ठ संख्या: 34 |


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