साधारण और सामान्य  

'साधारण' और 'सामान्य' दोनों का अर्थ समान समझ लिया जाता है, पर ऐसा है नहीं। कोई व्यक्ति या वस्तु साधारण न हो तो असाधारण हो सकता है, यानी साधारण से बहुत आगे, एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी: परंतु कोई वस्तु या व्यक्ति सामान्य न होकर 'असामान्य' हो तो बात एकदम बिगड़ जाती है और स्थिति 'ऐब्नार्मल' (असामान्य) की बन जाती है। यहाँ पता चलता है कि दोनों शब्दों में नकारात्मक 'अ' लगाने पर कितना बड़ा अर्थ-वैषम्य पैदा होता है। वास्तव में 'सामान्य' औसत बात के लिए है तो 'साधारण" इससे भी कुछ नीचे की स्थिति है।

उदाहरण

'जनरल नॉलेज सामान्य ज्ञान' है साधारण ज्ञान नहीं'।



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