व्यापार और व्यवसाय  

'व्यापार' और 'व्यवसाय' दोनों का अर्थ समान समझ लिया जाता है, पर ऐसा है नहीं। शब्दकोशों के सहारे इनका अंतर बहुत स्पष्ट नहीं हो पाता। उद्योग, कर्म, वाणिज्य, रोजगार, पेशा आदि अर्थ दोनों के ही हैं। परंतु ध्यान देने वाली बात ये है कि हर तरह का व्यापार व्यवसाय तो होगा ही होगा, लेकिन हर व्यवसाय आवश्यक नहीं कि व्यापार भी हो। व्यवसाय में व्यापार से अधिक विस्तार है। जीविकोपार्जन का उद्देश्य दोनों में ही निहित है, पर व्यापार में खरीदने, बेचने और लेन-देन करने का भाव विशेष है। 'व्यवसाय' का अर्थ 'पेशा' के आसपास है। जैसे कि खेती-बाड़ी, पत्रकारिता, नौकरी, वकालत, डॉक्टरी आदि 'व्यवसाय' या 'पेशा' तो हैं, पर ये 'व्यापार' नहीं हो सकते। व्यापार के लिए दुकानदारी करनी पड़ेगी, चीजों के क्रय-बिक्रय का धंधा करना पड़ेगा। हर व्यापारी व्यक्ति को 'बनिया' के रूप में आप देख सकते हैं, लेकिन हर व्यवसायी में आवश्यक नहीं कि बनिया तत्व हो।




पन्ने की प्रगति अवस्था
आधार
प्रारम्भिक
माध्यमिक
पूर्णता
शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=व्यापार_और_व्यवसाय&oldid=619730" से लिया गया