शंका और आशंका  

'शंका' और 'आशंका' दोनों का अर्थ समान समझ लिया जाता है, पर ऐसा है नहीं। वर्तमान और भविष्य का अंतर है इन दोनों शब्दों के अर्थ में। वर्तमान में कुछ गड़बड़ या अमंगल की भावना हो तो शंका होती है, पर जब वर्तमान के बजाय भविष्य में कुछ बुरा या अमंगल की भावना पैदा होती है तो समझिए कि बात आशंका की है।

उदाहरण

काम ठीक ढंग से चल रहा है, इस बात में 'शंका' हो सकती है, पर पड़ोसी देशों की हरकतों से युद्ध की 'आशंका' बनी ही रह सकती है।



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