आज्ञा और आदेश  

'आज्ञा' और 'आदेश' दोनों का अर्थ समान समझ लिया जाता है, पर ऐसा है नहीं। 'आज्ञा' और 'आदेश' दोनों ही बड़ों की ओर से दिए जाते हैं। कुछ करने का निर्देश दोनों में है, परंतु दोनों में विशिष्ट अंतर यह है कि 'आज्ञा' मानने में कर्तव्य का भाव है, नैतिक जिम्मेदारी की बात है तो 'आदेश' मानने में एक तरह की विवशता है। आदेश में शासन-प्रशासन का कार्यालयी वातावरण ज्यादा दिखाई देता है। यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा भी हो सकता है। आज्ञा पालन करने में एक तरह का आत्म-संतोष होता है। विनम्रता का परिचायक है आज्ञाकारी होना, परंतु आदेश मानने में आवश्यक नहीं कि आत्मसंतोष का भाव पैदा हो। हो सकता है कोई आदेश आप के मन में असंतोष का भाव भर दे और आदेश सुनते ही मन-ही-मन आप आदेश देने वाले को गालियाँ देने लगें।




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