मेधा पाटकर  

मेधा पाटकर
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पूरा नाम मेधा पाटकर
जन्म 1 दिसंबर, 1945
जन्म भूमि मुंबई
अभिभावक पिता- श्री वसंत खानोलकर और माता- इंदु खानोलकर
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि नर्मदा घाटी आंदोलन में सक्रिय
पद सामाजिक कार्यकर्ता
भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी
शिक्षा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई से 1976 में समाज सेवा की मास्टर डिग्री हासिल की।
अद्यतन‎

मेधा पाटकर (अंग्रेज़ी: Medha Patkar, जन्म: 1 दिसम्बर, 1954, मुंबई) भारत की प्रसिद्ध समाज सेविका के रूप में जानी जाती हैं। उन्हें 'नर्मदा घाटी की आवाज़' के रूप में पूरी दुनिया में जाना जाता है। गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित मेधा पाटकर ने 'सरदार सरोवर परियोजना' से प्रभावित होने वाले लगभग 37 हज़ार गाँवों के लोगों को अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ी है। उन्होंने महेश्वर बांध के विस्थापितों के आंदोलन का भी नेतृत्व किया। अरूंधती रॉय जैसी लेखिका उनकी निकट सहयोगी रही हैं।

जीवन परिचय

मेधा पाटकर का जन्म 1 दिसम्बर 1954 में मुंबई के एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। परिवार में पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री वसंत खानोलकर और माँ सामाजिक कार्यकर्ता इंदु खानोलकर जो महिलाओं के शैक्षिक, आर्थिक और स्वास्य के विकास के लिए काम करती थीं - की इस बेटी की परवरिश मुंबई के सामाजिक - राजनीतिक परिवेश में हुई। माता-पिता की प्रेरणा से वह उपेक्षितों की आवाज़ बनीं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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