पोस्टकार्ड  

पोस्टकार्ड
पोस्टकार्ड
विवरण पोस्टकार्ड एक मोटे काग़ज़ या पतले गत्ते से बना एक आयताकार टुकड़ा होता है जिसे संदेश लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है, साथ ही इसे बिना किसी लिफ़ाफ़े में बंद किये, डाक द्वारा भेजा भी जा सकता है।
आविष्कार पोस्टकार्ड का आविष्कार आस्ट्रिया में 1869 को हुआ था। वह इतना लोकप्रिय साबित हुआ कि एक महीने में ही 15 लाख पोस्टकार्ड बिक गए।
भारत में शुरुआत भारत में पहली बार 1 जुलाई 1879 को पोस्टकार्ड जारी किए गये।
लोकप्रियता जबसे पोस्टकार्डों का प्रचलन हुआ है, तभी से जनता के पत्र-व्यवहार का माध्यम ये पोस्टकार्ड रहे हैं। हमारे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ये काफ़ी लोकप्रिय है। इस समय प्रतिवर्ष अरबों की संख्या में पोस्टकार्ड देश के एक छोर से दूसरे छोर तक, देशवासियों को भातृत्व के बंधन में बांधने का कार्य करते हैं।
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अन्य जानकारी 2 अक्टूबर 1951 को तीन चित्र पोस्टकार्डों की एक शृंखला जारी की गई, जिसमें एक पर बच्चे को लिए हुए गांधी जी, दूसरे पर चर्खा चलाते हुए गांधी जी और तीसरे पर कस्तूरबा गांधी के साथ गांधी जी का चित्र अंकन था।

पोस्टकार्ड एक मोटे काग़ज़ या पतले गत्ते से बना एक आयताकार टुकड़ा होता है जिसे संदेश लिखने के लिए प्रयोग किया जाता है, साथ ही इसे बिना किसी लिफ़ाफ़े में बंद किये, डाक द्वारा भेजा भी जा सकता है। अधिकतर देशों में इसका शुल्क एक लिफाफे के (जिस पर डाक टिकट चिपकाई गयी हो) द्वारा भेजे गये एक पत्र की तुलना में कम होता है। संचार माध्यमों के इस युग में भी अपने जाने-चाहे लोगों तक संदेश पहुंचाने का सबसे सस्ता तरीका पोस्टकार्ड ही है। महात्मा गांधी पोस्टकार्ड के अच्छे ख़ासे प्रशंसक एवं उपयोगकर्ता थे। उन्होंने अपने सैंकड़ों पत्र पोस्टकार्डों पर लिखे। पोस्टकार्ड के इस विश्व-विख्यात उपयोगकर्ता को सम्मानित करने के लिए डाक विभाग ने 1951 और 1969 में विशेष गांधी पोस्टकार्ड जारी किए। डाक का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। उस समय एक राजा दूसरे राज्य के राजा तक अपना संदेश एक विशेष व्यक्ति जिसे दूत कहा जाता था, के माध्यम से भेजते थे। उन दूतों को राज्य की ओर से सुरक्षा तथा सम्मान प्रदान किया जाता था।

पौराणिक उल्लेख

महाकाव्य रामायण तथा महाभारत में कई प्रसंगों में संदेश भेजे जाने का उल्लेख प्राप्त होता है। राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता और राम के विवाह होने का संदेश राम के पिता दशरथ को भिजवाया था। रावण की राजसभा में श्रीराम का सन्देश लेकर अंगद का जाना, इस बात का प्रमाण है। महाभारत में श्रीकृष्ण का कौरवों के पास पांडवों के लिए पांच गांव मांगने जाना तथा अनेक राज्यों में पांडवों तथा कौरवॊं के पक्ष में, युद्ध में भाग लेने के लिए संदेश पहुँचाना, प्राचीन समय की संचार व्यवस्था का उदाहरण है कि कोई डाक व्यवस्था उस समय काम कर रही होगी।

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अन्य प्रसंगों में राजा नल द्वारा दमयन्ती के बीच सन्देशों का आदान-प्रदान हंस द्वारा होने का वर्णण आता है। महाकवि कालीदास के मेघदूत में दक्ष अपनी प्रेमिका के पास मेघों के माध्यम से सन्देश पहुँचाते थे। एक प्रेमी राजकुमार अपनी प्रेमिका को कबूतरों द्वारा पत्र पहुँचाते थे। खुदाई के दौरान कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं कि मिस्र, यूनान एवं चीन में डाक व्यवस्था थी। सिकन्दर महान ने भारत से यूनान तक संचार व्यवस्था बनाई थी, जिससे उसका संपर्क यूनान तक रहता था। अनेक राजा-महाराजा एक स्थान से दूसरे स्थान तक सन्देश पहुंचाने के लिए द्रुतगति से दौडने वाले घोड़ों का प्रयोग किया करते थे। यह सब कालान्तर की बातें तो है ही, साथ ही रोचक भी है। पोस्टकार्ड का प्रयोग केवल उच्च वर्ग तक ही सीमित था। साधारण जन इससे कोसों दूर था। बाद मे कई प्रयास किए गए और डाक व्यवस्था में निरन्तर सुधार आता गया और आज यह व्यवस्था आम हो गई है।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 कहानी पोस्टकार्ड की (हिंदी) Amstel Ganga। अभिगमन तिथि: 24 दिसम्बर, 2013।
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 2.4 कहानी पोस्टकार्ड की (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 24 दिसम्बर, 2013।
  3. उस समय एक आने में चार पैसे हुआ करते थे
  4. जिस पर डाक टिकट चिपकाई गयी हो

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