डाकिया  

डाकिया
डाकिया
विवरण 'डाकिया' खाकी पैंट और खाकी कमीज़ पहने, कंधे पर खाकी झोला लटकाए एक व्यक्ति होता है।
अन्य नाम डाक बाबू, डाकिया भैया, पोस्टमैन, चिट्ठीरसा
महत्त्व ज़मीनी स्तर पर डाकिया ही डाक विभाग का वास्तविक प्रतिनिधि होता है। भारतीय समाज में डाकिया को सबसे सम्मान का दर्जा मिला है। सरकार और जनता के बीच संवाद की वह सबसे मजबूत कड़ी है।
वर्तमान में जैसे-जैसे व्यक्तिगत एवं सामाजिक रिश्तों में आत्मीयता व भावनात्मकता कम होती गयी, वैसे-वैसे ही डाकिया का दृष्टिकोण भी भावनात्मक की बजाय व्यवसायिक होता गया।
संबंधित लेख भारतीय डाक, डाक संचार, डाक टिकट, डाकघर, तार, पोस्टकार्ड
अन्य जानकारी डाकिया कम वेतन पाकर भी अपना काम अत्यन्त परिश्रम और लगन के साथ सम्प्पन्न करता है। गर्मी, सर्दी और बरसात का सामना करते हुए वह समाज की सेवा करता है।

डाकिया खाकी पैंट और खाकी कमीज़ पहने, कंधे पर खाकी झोला लटकाए एक व्यक्ति होता है। हमारे जीवन में डाकिए की भूमिका अत्यन्त महत्तपूर्ण है। भले ही अब कंप्यूटर और ई-मेल का ज़माना आ गया है पर, डाकिया का महत्व अभी भी उतना ही बना हुआ है जितना पहले था। डाकिया ग्रामीण जन-जीवन का एक सम्मानित सदस्य माना जाता है। डाकिया केवल संदेश-दाता नहीं, अर्थ दाता भी है। डाकिया का कार्य बड़ा कठिन होता है। वह सुबह से शाम तक चलता ही रहता है। डाकिया कम वेतन पाकर भी अपना काम अत्यन्त परिश्रम और लगन के साथ सम्प्पन्न करता है। गर्मी, सर्दी और बरसात का सामना करते हुए वह समाज की सेवा करता है। डाकिया एक सुपरिचित व्यक्ति है। उससे हमारा व्यक्तिगत संपर्क होता है। [1]

सामाजिक जीवन की एक आधारभूत कड़ी

'डाकिया' भारतीय सामाजिक जीवन की एक आधारभूत कड़ी है। डाकिया द्वारा डाक लाना, पत्रों का बेसब्री से इंतज़ार, डाकिया से ही पत्र पढ़वाकर उसका जवाब लिखवाना इत्यादि तमाम महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन्हें नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। उसके परिचित सभी तबके के लोग हैं। कभी-कभी जो काम बड़े अधिकारी भी नहीं करा पाते वह डाकिया चंद मिनटों में करा देता है। कारण डाक विभाग का वह सबसे मुखर चेहरा है। जहाँ कई अन्य देशों ने होम-टू-होम डिलीवरी को खत्म करने की तरफ कदम बढ़ाये हैं, या इसे सुविधा-शुल्क से जोड़ दिया है, वहीं भारतीय डाकिया आज भी देश के हर होने में स्थित गाँव में निःशुल्क अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। जैसे-जैसे व्यक्तिगत एवं सामाजिक रिश्तों में आत्मीयता व भावनात्मकता कम होती गयी, वैसे-वैसे ही डाकिया का दृष्टिकोण भी भावनात्मक की बजाय व्यवसायिक होता गया। [2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भगवान के डाकिए (हिंदी)। । अभिगमन तिथि: 27 दिसम्बर, 2013।
  2. डाकिया: बदलते हुए रूप (हिंदी) साहित्य शिल्पी। अभिगमन तिथि: 27 दिसम्बर, 2013।
  3. 3.0 3.1 3.2 भारतीय पोस्टमैन (हिंदी) भारतीय डाक (ब्लॉग)। अभिगमन तिथि: 27 दिसम्बर, 2013।
  4. World Post Day: कहीं खो तो नहीं जाएगा डाकिया (हिंदी) जागरण जंक्शन। अभिगमन तिथि: 27 दिसम्बर, 2013।
  5. अब नहीं रहता डाकिये का इंतज़ार (हिंदी) समय लाइव। अभिगमन तिथि: 27 दिसम्बर, 2013।

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