कशेरुक दण्ड  

कशेरुक दण्ड
Back Bone

(अंग्रेज़ी:Back Bone) कशेरुक दण्ड अधिकांश जीव जंतुओं के शरीर का आवश्यक अंग हैं। इस लेख में मानव शरीर से संबंधित उल्लेख है। कशेरुक दण्ड हमारी पीठ की मध्य रेखा में सिर से धड़ के निचले सिरे तक फैली अस्थीय संरचना होती है जो पुरुषों में लगभग 71 सेमी. तथा स्त्रियों में लगभग 61 सेमी. लम्बी होती है। यह प्रायः पीठ की त्वचा से ढ़की सतह पर उभरी हुई दिखाई देती है। इसे मेरुदण्ड या रीढ़ की हड्डी भी कहते हैं। कशेरुक दण्ड पर हमारा सिर सधा रहता है। इसी में मेरुरज्जु या सुषुम्ना सुरक्षित बन्द रहता है। यह पसलियों को जुड़ने के लिए स्थान तथा पादों की मेखलाओं को सहारा देता है। इसी से पीठ की पेशियाँ जुड़ी रहती हैं, जिसके कारण हम अपने धड़ को आवश्यकतानुसार आगे–पीछे या पार्श्वों में कुछ सीमा तक झुका और घुमा सकते हैं।

सरंचना

कशेरुक दण्ड एक दूसरी के पीछे जुड़ी हुई 26 (शिशुओं में 33) छोटी–छोटी अस्थियों की बनी हैं, जिन्हें कशेरुकाएँ कहते हैं इनका वितरण निम्नवत होता है:-
सभी निकटवर्ती कशेरुकाओं के बीच–बीच में चपटी अन्तरकशेरुक गद्दियाँ होती है। इनका केन्द्रीय भाग कोमल लचीला उपास्थि का तथा परिधीय भाग तन्तुमय उपास्थि का बना होता है। केन्द्रीय भाग को मज्जी केन्द्रक कहते हैं। गद्दियों के कारण कशेरुक दण्ड पर्याप्त लचीला होता है और बाहरी आघातों को भी सोख लेता है।  

झुकाव

सीधे खड़ा होने पर भी कशेरुक दण्ड पूर्णतः सीधी स्थिति में नहीं होता है। पार्श्वों से देखने पर इसमें चार झुकाव दिखाई देते हैं। ये ऊपर से नीचे की ओर क्रमशः ग्रीवा, वक्षीय, कटि तथा त्रिक झुकाव या मोड़ होते हैं ये झुकाव कशेरुक दण्ड को दृढ़ता प्रदान करते हैं, खड़े रहने, चलने फिरने और दौड़ने में शारीरिक सन्तुलन बनाए रखते हैं, झटकों से रक्षा करते हैं तथा इस टूटने से बचाते हैं।  

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