कपाल  

कपाल या 'खोपड़ी' का आशय उन अस्थियों से है, जो सिर तथा चहरे को आकृति प्रदान करती हैं। मानव कपाल अस्थियों से बना हुआ है। यह गुंबज के समान उभरा हुआ कुछ चपटा, गोल तथा अंडे के आकार का होता है। निचले जबड़े[1] को छोड़कर, जो केवल तंतुओं द्वारा जुड़ा रहता है, कपाल की सभी अस्थियाँ प्रौढ़ावस्था में आपस में पूर्णरूपेण जुड़ी रहती हैं। कपाल के सभी जोड़ अचल होते हैं। इसकी अस्थियों के टुकड़ों के किनारे आरे के दाँतों की भाँति होते हैं। एक अस्थि दूसरी अस्थि के खाँचे में पूर्ण रूप से संसक्त होती है। इस प्रकार इनमें किसी प्रकार की सापेक्ष गति नहीं होती। कपाल में अनेक गड्ढे तथा छिद्र होते हैं तथा उनमें संबंधित मांसपेशियाँ और स्नायु रहती है। नासिका गुहा में श्वास तथा गंध संबंधी संस्थान रहता है। मुख में स्वाद तथा भोजन की पाचन क्रिया आरंभ होती है। शंखास्थि में संतुलन तथा श्रवण संस्थान स्थित रहता है।

संरचना

मानव शरीर अस्थिपंजर का बना हुआ है। अस्थि के ऊपर मांसपेशी तथा त्वचा का आवरण रहता है। अस्थिपंजर शरीर को आकृति प्रदान करता तथा पुष्टि देता है; इसके अतिरिक्त शरीर के कोमल अंगों, जैसे- मस्तिष्क, फुफ्फुस, यकृत, प्लीहा आदि को सुरक्षित रखता है। मांसपेशियाँ भी इन्हीं अस्थियों के सहारे एक-दूसरे से संबंधित रहती हैं। नवजात शिशुओं में कपाल की अस्थियाँ पूर्ण रूप से संयुक्त नहीं होतीं। फलत: कपाल में ख़ाली स्थान होते हैं, जिन्हें हम त्वचा को छूकर ज्ञात कर सकते हैं। परंतु बड़े होने पर अस्थियाँ बढ़कर इन रिक्त स्थानों को ढक लेती हैं। जन्म के समय कपाल शरीर के अनुपात में बड़ा होता है। चेहरा कपाल के अनुपात में छोटा होता है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है, चेहरा बड़ा होता जाता है तथा कपाल और शरीर का अनुपात भी ठीक होता जाता है।[2]

कपाल के ऊपरी गोलार्ध पर, जन्म के समय अस्थियों का पूर्ण रूप से निर्माण न होने के कारण, रिक्त स्थानों पर कड़े बंधक तंतु रहते हैं। इन अस्थियों के सिरे पर आरे की भाँति दाँते उपस्थित नहीं रहते। कुछ स्थानों पर रिक्त स्थान अधिक बड़े होते हैं, जिन्हें 'फ़ॉण्टानेल'[3] कहते हैं। ये पार्श्विकास्थि[4] के चारों सिरों पर पाए जाते हैं। इनमें सबसे बड़ा आगे का फॉण्टानेल होता है, जो वर्गाकार होता है। यह ललाटास्थि तथा पार्श्विकास्थि के बीच में रहता है। यह लगभग 18 मास की आयु में बंद हो जाता है। पीछे का फॉण्टानेल त्रिकोणाकार होता है, जो पार्श्वास्थि तथा पीछे की अस्थि के बीच में स्थित रहता है। यह 16 मास की आयु में बंद हो जाता है। इस प्रकार जन्म से लेकर प्रौढ़ावस्था तक कपाल की अस्थियों के आकार प्रकार में परिवर्तन होते रहते हैं। परिणामस्वरूप इन अस्थियों से तथा दाँतों से आयु का पता लगाने में बहुत कुछ सहायता मिल सकती है, जैसे-

  1. प्रथम वर्ष की आयु के पश्चात् आगे के फ़ॉण्टानेल को छोड़कर सभी रिक्त स्थान बंद हो जाते हैं। शंखास्थ के चारों भाग आपस में जुड़ जाते हैं तथा नीचे के जबड़े की अस्थि के दोनों भाग भी आपस में जुड़ जाते हैं।
  2. इसी प्रकार 20 वर्ष की आयु के पश्चात्‌ कपाल की सभी सीवनियाँ[5] अदृश्य हो जाती हैं।
  3. कपाल से लिंग का ज्ञान भी हो सकता है। नारी का संपूर्ण कपाल और उसकी अलग-अलग अस्थियाँ भी पुरुष के कपाल की अपेक्षा छोटी होती हैं। परतु, फिर भी कपाल की अस्थियों द्वारा लिंग का निर्धारण कठिन कार्य है।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मैंडिबल, mandible
  2. 2.0 2.1 2.2 2.3 2.4 कपाल (हिन्दी) भारतखोज। अभिगमन तिथि: 04 अगस्त, 2014।
  3. Fontanell
  4. पैरीयल बोन Parietal bone
  5. टाँके
  6. माथा
  7. Condyles
  8. Fibrous tissue
  9. Mental formen
  10. Alvelar margin
  11. फ़ंटल बोन, frontal bone
  12. कार्टिलेज, cartilage
  13. ग्रूव, groove

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