कॉर्निया  

आँख में कॉर्निया की स्थिति

कॉर्निया (अंग्रेज़ी: Cornea) आँख का वह पारदर्शी हिस्सा है, जिस पर बाहर का प्रकाश पड़ता है। यह आँख का दो तिहाई भाग है, जिसमें बाहरी आँख का रंगीन हिस्सा, पुतली और लेंस का प्रकाश देने वाला हिस्सा शामिल होता है। कॉर्निया में कोई रक्त वाहिका नहीं होती, बल्कि इसमें तंत्रिकाओं का एक जाल होता है। इसको पोषण देने वाले द्रव्य वही होते हैं, जो आंसू और आँख के अन्य पारदर्शी द्रव का निर्माण करते हैं।

कार्य

आमतौर पर कॉर्निया की तुलना लेंस से की जाती है, लेकिन इनमें काफ़ी अंतर होता है। एक लेंस केवल प्रकाश को अपने पर गिरने के बाद फैलाने या सिकोड़ने का काम करता है, जबकि कॉर्निया का कार्य इससे व्यापक है। कॉर्निया वास्तव में प्रकाश को आँख की पुतली (नेत्र गोलक) में आने देता है। इसका उभरा हुआ (उत्तल) हिस्सा इस प्रकाश को आगे यानी पुतली और लेंस में भेजता है। इस तरह यह विजन का काम करता है। कॉर्निया का गुंबदाकार ही यह तय करता है कि किसी व्यक्ति की आँख में दूरदृष्टि दोष है या निकट दृष्टि दोष। देखने के दौरान बाहरी लेंसों का प्रयोग बिंब को आँख के लेंस पर फोकस करना होता है। इससे कॉर्निया मॉडीफाइड हो सकता है। ऐसे में कॉर्निया के पास स्थित कांटेक्ट लेंस इसकी मोटाई को बढ़ाकर एक नया केंद्र बिंदु[1] बना देता है।[2]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. फोकल प्वाइंट
  2. कॉर्निया (हिन्दी) हिन्दुस्तान। अभिगमन तिथि: 14 फ़रवरी, 2015।

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