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*नोकरेक गारों पहाडियों को सबसे ऊंचा बिन्दु है और यहाँ [[हाथी]] तथा हू लॉक गिब्बन सहित अनेक प्रकार की वन्य प्रजातियाँ पाई जाती हैं। | *नोकरेक गारों पहाडियों को सबसे ऊंचा बिन्दु है और यहाँ [[हाथी]] तथा हू लॉक गिब्बन सहित अनेक प्रकार की वन्य प्रजातियाँ पाई जाती हैं। | ||
*नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान में सिट्रस इंडिका की अत्यंत दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती है जिसका नाम है मेमांग | *नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान में सिट्रस इंडिका की अत्यंत दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती है जिसका नाम है मेमांग नारंग। | ||
*नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना नोकरेक में तथा इसके आस पास वाले स्थानों में जंगली हाथियों के समूह, पक्षियों की दुर्लभ किस्में तथा दुर्लभ ऑर्किड के संरक्षण के लिए की गई थी। | *नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना नोकरेक में तथा इसके आस पास वाले स्थानों में जंगली हाथियों के समूह, पक्षियों की दुर्लभ किस्में तथा दुर्लभ ऑर्किड के संरक्षण के लिए की गई थी। | ||
*नोकरेक को जंगली मनुष्य का घर माना जाता है और नोकरेक के गांव के आस पास इन्हें देखे जाने के मामले बताए गए हैं। | *नोकरेक को जंगली मनुष्य का घर माना जाता है और नोकरेक के गांव के आस पास इन्हें देखे जाने के मामले बताए गए हैं। | ||
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08:43, 9 जनवरी 2012 का अवतरण
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नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान मेघालय के पश्चिमी गारो हिल्स ज़िले में बायोस्फीयर रिजर्व तूरा से लगभग 12 किमी की दूरी पर स्थित है।
- नोकरेक गारों पहाडियों को सबसे ऊंचा बिन्दु है और यहाँ हाथी तथा हू लॉक गिब्बन सहित अनेक प्रकार की वन्य प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान में सिट्रस इंडिका की अत्यंत दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती है जिसका नाम है मेमांग नारंग।
- नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना नोकरेक में तथा इसके आस पास वाले स्थानों में जंगली हाथियों के समूह, पक्षियों की दुर्लभ किस्में तथा दुर्लभ ऑर्किड के संरक्षण के लिए की गई थी।
- नोकरेक को जंगली मनुष्य का घर माना जाता है और नोकरेक के गांव के आस पास इन्हें देखे जाने के मामले बताए गए हैं।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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