"गीता 10:12-13": अवतरणों में अंतर
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आप परम [[ब्रह्मा]]<ref>सर्वश्रेष्ठ पौराणिक त्रिदेवों में ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की गणना होती है। इनमें ब्रह्मा का नाम पहले आता है, क्योंकि वे विश्व के आद्य | आप परम [[ब्रह्मा]]<ref>सर्वश्रेष्ठ पौराणिक त्रिदेवों में ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव की गणना होती है। इनमें ब्रह्मा का नाम पहले आता है, क्योंकि वे विश्व के आद्य स्रष्टा, प्रजापति, पितामह तथा हिरण्यगर्भ हैं।</ref>, परम धाम और परम पवित्र हैं, क्योंकि आपको सब ऋषिगण सनातन, दिव्य पुरुष एवं देवों का भी आदि देव, अजन्मा और सर्वव्यापी कहते हैं। वैसे ही देवर्षि [[नारद]]<ref>नारद मुनि, [[हिन्दू]] शास्त्रों के अनुसार, [[ब्रह्मा]] के सात मानस पुत्रों मे से एक हैं।</ref> तथा [[असित]] और देवल ऋषि तथा महर्षि [[व्यास]]<ref>भगवान व्यास भगवान नारायण के ही कलावतार थे। व्यास जी के [[पिता]] का नाम [[पाराशर|पाराशर ऋषि]] तथा [[माता]] का नाम [[सत्यवती]] था।</ref> भी कहते हैं और स्वयं आप भी मेरे प्रति कहते हैं ।।12-13।। | ||
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07:28, 7 नवम्बर 2017 के समय का अवतरण
गीता अध्याय-10 श्लोक-12, 13 / Gita Chapter-10 Verse-12, 13
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
संबंधित लेख |
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