पृथ्वीराज रासो  

पृथ्वीराज रासो
पृथ्वीराज रासो
कवि चंदबरदाई
मूल शीर्षक पृथ्वीराज रासो
मुख्य पात्र पृथ्वीराज चौहान
देश भारत
शैली काव्य
विषय जीवन चरित्र का वर्णन
विधा महाकाव्य
विशेष 'पृथ्वीराज रासो' वीर रस का हिंदी का सर्वश्रेष्ठ काव्य है।

पृथ्वीराज रासो हिन्दी भाषा में लिखा गया एक महाकाव्य है, जिसमें पृथ्वीराज चौहान के जीवन-चरित्र का वर्णन किया गया है। यह कवि चंदबरदाई की रचना है, जो पृथ्वीराज के अभिन्न मित्र तथा राजकवि थे। इसमें दिल्लीश्वर पृथ्वीराज के जीवन की घटनाओं का विशद वर्णन है। यह एक विशाल महाकाव्य है। यह तेरहवीं शती की रचना है। डॉ. माताप्रसाद गुप्त इसे 1400 वि. के लगभग की रचना मानते हैं। पृथ्वीराज रासो की ऐतिहासिकता विवादग्रस्त है।[1]

हिन्दी साहित्य का महाकाव्य

इस पुस्तक के बारे में संदेह यह है कि यह रचना 'डिंगल' की है अथवा 'पिंगल' की। यह ग्रंथ एक से अधिक रचयिताओं का हो सकता है। 'पृथ्वीराज रासो' ढाई हज़ार पृष्ठों का संग्रह है। इसमें पृथ्वीराज व उनकी प्रेमिका संयोगिता के परिणय का सुन्दर वर्णन है। यह ग्रंथ ऐतिहासिक कम काल्पनिक अधिक है। 'पृथ्वीराज रासो' तथा 'आल्हाखण्ड' हिन्दी साहित्य के आदि काल के दो प्रसिद्ध महाकाव्य हैं। पृथ्वीराज रासो को हम साहित्यिक परम्परा का विकसनशील महाकाव्य और आल्हाखण्ड को लोक-महाकाव्य की संज्ञा दे सकते हैं। रासो का वृहत्तम रूपान्तर जो नागरीप्रचारिणी सभा से प्रकाशित है, 69 समय (सर्ग) का विशाल ग्रन्थ है। इसमें अन्तिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन-वृत्त के साथ सामन्ती वीर-युग की सभ्यता, रहन-सहन, मान-मर्यादा, ख़ान-पान तथा अन्य जीवन-विधियों का इतना क्रमवार और सही वर्णन हुआ है कि इसमें तत्कालीन समग्र युगजीवन अपने समस्त गुण-दोषों के साथ यथार्थ रूप में चित्रित हो उठा है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. रासो काव्य : वीरगाथायें (हिन्दी)। । अभिगमन तिथि: 15 मई, 2011।
  2. हिन्दी साहित्य का इतिहास, वीरगाथा काल (संवत् 1050 - 1375) अध्याय 3, लेखक - रामचन्द्र शुक्ल
  • संक्षिप्त पृथ्वीराज रासो: सं. हजारीप्रसाद द्विवेदी तथा नामवर सिंह, साहित्य भवन लि., प्रयाग;
  • पृथ्वीराज रासो : सं. कविराय मोहन, साहित्य संस्थान, संस्थान, राजस्थान विश्व विद्यापीठ, उदयपुर।
  • पृथ्वीराज-विजय : सं. गौरीशंकर हीराचंद ओझा, अजमेर ;
  • सुर्जन चरित महाकाव्य (चंद्रशेखर कृत) सं. डा. चंद्रधर शर्मा, हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी;

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