जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी  

जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी
रामचरितमानस
कवि गोस्वामी तुलसीदास
मूल शीर्षक रामचरितमानस
मुख्य पात्र राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण आदि
प्रकाशक गीता प्रेस गोरखपुर
शैली चौपाई और दोहा
संबंधित लेख दोहावली, कवितावली, गीतावली, विनय पत्रिका, हनुमान चालीसा
काण्ड अरण्यकाण्ड
चौपाई

जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी। सब के हृदयँ निरंतर बासी॥
तदपि अनुज श्री सहित खरारी। बसतु मनसि मम काननचारी॥9॥

भावार्थ

यद्यपि आप निर्मल, व्यापक, अविनाशी और सबके हृदय में निरंतर निवास करनेवाले हैं; तथापि हे खरारि श्री राम! लक्ष्मण और सीता सहित वन में विचरनेवाले आप इसी रूप में मेरे हृदय में निवास कीजिए।॥9॥



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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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