कवितावली -तुलसीदास  

कवितावली -तुलसीदास
कवितावली
कवि गोस्वामी तुलसीदास
मूल शीर्षक कवितावली
मुख्य पात्र श्रीराम
प्रकाशक गीताप्रेस गोरखपुर
देश भारत
भाषा अवधी
शैली कवित्त, चौपाई, सवैया आदि छंदों में की गई है।
विषय श्रीराम की जीवनकथा
भाग सात काण्डों में विभाजित
मुखपृष्ठ रचना सजिल्द
टिप्पणी इसके छ्न्दों का रचना- काल संख्या 1655 से 1680 तक ज्ञात होता है।

कवितावली गोस्वामी तुलसीदास की प्रमुख रचनाओं में है। सोलहवीं शताब्दी में रची गयी कवितावली में श्री रामचन्द्र के इतिहास का वर्णन कवित्त, चौपाई, सवैया आदि छंदों में की गई है। रामचरितमानस के जैसे ही कवितावली में भी सात काण्ड हैं। ये छन्द ब्रजभाषा में लिखे गये हैं और इनकी रचना प्राय: उसी परिपाटी पर की गयी है जिस परिपाटी पर रीति काल का अधिकतर रीति- मुक्त काव्य लिखा गया।

रचना काल

16वीं शताब्दी में रची गयी कवितावली में श्री रामचन्द्र जी के इतिहास का वर्णन कवित्त, चौपाई, सवैया आदि छंदों में की गई है। 'कवितावली' के अधिकतर छंद केशव की 'कविप्रिया' तथा 'रसिकप्रिया' के रचना- काल के आस- पास और बाद के है। जो छन्द उत्तरकाण्ड में आते हैं उनमें भी तुलसीदास के कवि- जीवन के उत्तरार्ध की ही घटनाओं का उल्लेख हुआ है। कुछ छ्न्द तो कवि के जीवन के निरे अंत के ज्ञात होते हैं। इसलिए 'कवितावली' के छ्न्दों का रचना- काल संख्या 1655 से 1680 तक ज्ञात होता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ


धीरेंद्र, वर्मा “भाग- 2 पर आधारित”, हिंदी साहित्य कोश (हिंदी), 76।

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