सोयाबीन  

सोयाबीन

सोयाबीन एक बहुउपयोगी 40 से 50 प्रतिशत तक तेल देने वाली द्विदल फ़सल है। इसका उत्पादन 1975 के पश्चात् देश में निरन्तर बढ़ता जा रहा है। यह मुख्यतः रबी की फ़सल हैं और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी पैदा की जा सकती है। प्रारम्भ में पाला सोयाबीन के लिए घातक नहीं है। इसे अब खरीफ काल में भी बोना आसान है। इसका उपयोग तेल निकालने, प्रोटीनयुक्त पदार्थ, प्रोटीन व विविध मानव व पशु आहार आदि में होता है, क्योंकि अन्य दलहनों या तिलहनों की तुलना में इसमें प्रोटीन एवं तेल का अंश बहुत अधिक होता है अतः सोया, दूध एवं सोया आहार इसी कारण विशेष प्रचलित हो रहे हैं। अब रिफाइण्ड सोयाबीन के तेल की खपत मूंगफली एवं सरसों के तेल के पश्चात् सबसे अधिक होने लगी है। इसके सभी उत्पाद स्वास्थ्य के लिए गुणकारी माने गए हैं।

परिचय

सोयाबीन दाल की तरह एक वस्तु है, परन्तु इससे उत्पन्न दूध और दही देखने में और खाने में दूध और दूध की वस्तुओं की तरह ही होते हैं परन्तु इसका मूल्य दूध के मूल्य का सोलवां भाग है। उपकारिता की दृष्टि से भी सोयाबीन का स्थान दूध से किसी तरह कम नहीं हैं। संसार में सोयाबीन के समान पुष्टिकारक कोई अन्य खाद्य मिलना कठिन है। यह विभिन्न विटामिन, धातव, लवण और उच्च श्रेणी के प्रोटीन, शर्करा तथा चर्बी जातीय खाद्यों से समृद्ध है। सोयाबीन गुणवत्ता की दृष्टी से भी सभी खाद्यान्नों से बढ़कर है। इन्हीं सब विशेषताओं के कारण सोयाबीन को जादुई बीज भी कहा जाता है।[1]

वैज्ञानिक नाम

सोयाबीन का वैज्ञानिक नाम ग्लाईसिन मैक्स (Glycine max) हैं। यह शिम्बी कुल और सेम जाति का धान्य हैं। अंग्रेज़ी में इसे सोयाबीन तथा हिंदी सोया, सेवदाना भट्वास कहा जाता हैं। यह वसा हृदय रोग में हितकर हैं और घी व माखन के सामान रोग प्रतिरोधक हैं।

प्रकार

सोयाबीन कई प्रकार के होते हैं - लाल, पीले, बादामी, काले आदि रंगों के सोयाबीन बाज़ार में बिकते है। मनुष्य केवल हरे तथा सफ़ेद रंग के सोयाबीन खाद्य के रूप में ग्रहण करते हैं।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 सोयाबीन एक वरदान (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) है बातों में दम (ब्लॉग)। अभिगमन तिथि: 9 सितंबर, 2011।
  2. स्वास्थ्य ब्लॉग: सोयाबीन और भिन्डी के गुणकारी गुण (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) जागरण जंक्शन। अभिगमन तिथि: 9 सितंबर, 2011।
  3. सोयाबीन प्रसंस्करण -एक घरेलू उद्योग (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) न्यूज़ आज डॉट इन। अभिगमन तिथि: 9 सितंबर, 2011।
  4. सोयाबीन (हिन्दी) (पी.एच.पी.) jkhealthworld.com। अभिगमन तिथि: 9 सितंबर, 2011।
  5. 5.0 5.1 5.2 5.3 5.4 सॊयाबीन प्रसंस्करण की आवश्यकता क्यों (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) krishisewa.com। अभिगमन तिथि: 9 सितंबर, 2011।
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