लॉर्ड नार्थब्रुक  

लॉर्ड नार्थब्रुक

लॉर्ड नार्थब्रुक 1872 ई. से 1876 ई. तक भारत का वाइसराय और गवर्नर-जनरल रहा। वह 'ग्लैडस्टोन' के विचारों का समर्थक और उदार दल का था। भारत में उसकी नीति "करों में कमी, अनावश्यक क़ानूनों को न बनाने तथा कृषि योग्य भूमि पर भार कम करने" की थी।

करों में कमी

लॉर्ड नार्थब्रुक मुक्त व्यापार का समर्थक था, परन्तु आयात होने वाली वस्तुओं पर अल्प करों से होने वाली आय को तिलांजलि नहीं दे सका। उसने तेल, चावल, नील और लाख को छोड़कर निर्यात होने वाली समस्त वस्तुओं पर से निर्यात कर हटा दिया और आयात करों में भी 7 प्रतिशत से 5 प्रतिशत की कमी कर दी। परन्तु इस अल्प आयात कर का भी लंकाशायर के सूती उद्योगपतियों ने विरोध किया। परिणामस्वरूप लॉर्ड डिजरेली की अनुदार सरकार तथा तत्कालीन भारत मंत्री लॉर्ड सैलिबरी ने उद्योगपतियों के हितों को ध्यान में रखकर 5 प्रतिशत के आयात कर को भी हटा देने पर बल दिया। इस कारण भारत मंत्री (लॉर्ड सैलिसबरी) और नार्थब्रुक में मतभेद हो गया। यह मतभेद अफ़ग़ानिस्तान के प्रति अपनायी जाने वाली नीति के प्रश्न पर और भी बढ़ गया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

भट्टाचार्य, सच्चिदानन्द भारतीय इतिहास कोश, द्वितीय संस्करण-1989 (हिन्दी), भारत डिस्कवरी पुस्तकालय: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, 221।

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