लॉर्ड मिण्टो द्वितीय  

लॉर्ड मिण्टो द्वितीय (1845-1914 ई.), लॉर्ड कर्ज़न के बाद 1905 से 1910 ई. तक भारत का वाइसराय तथा गवर्नर-जनरल रहा। वह लॉर्ड मिण्टो प्रथम का प्रपौत्र था। इसका पूरा नाम 'गिलबर्ट जॉन एलिएट मिण्टो' था, जिसका जन्म 9 जुलाई, 1845 को लन्दन, इंग्लैण्ड में हुआ और मृत्यु 1 मार्च 1914 में, मिण्टो रॉक्सबर्ग, स्कॉटलैण्ड में हुई। लॉर्ड कर्ज़न ने भारत में जो संकटपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर दी थी, उसका सामना करने में तथा तत्कालीन भारतमंत्री लॉर्ड जॉन मार्ले के साथ मिल-जुलकर कार्य करने में उसने काफ़ी युक्ति कौशल का परिचय दिया। लॉर्ड कर्ज़न और प्रधान सेनापति लॉर्ड किचनर एक-दूसरे से झगड़ा कर बैठे थे। उसने लॉर्ड किचनर से झगड़ा समाप्त किया और अफ़ग़ानिस्तान के अमीर के सम्बन्धों में काफ़ी सुधार किया। अमीर उससे मिलने के लिए कलकत्ता आया।

भारत का वाइसराय

यह (1898-1905 ई.) तक कनाडा का गवर्नर-जनरल तथा (1905-1910 ई.) तक भारत का वाइसराय रहा। भारत में इसने एवं इसके साथ लॉर्ड जॉन मॉर्ले ने मॉर्ले मिण्टो सुधार अधिनियम (1909 ई.) प्रायोजित किया। इस अधिनियम से सरकार में भारतीय प्रतिनिधित्व में मामूली वृद्धि की गई, लेकिन हिन्दुओं और मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचक मण्डल बनाने के कारण भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसकी आलोचना की, क्योंकि उनका विश्वास था कि इससे ब्रिटिश शासन के लिए रास्ता साफ़ करने के लिए भारतीयों में दरार पैदा की गई है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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