रामस्वामी वेंकटरमण  

रामस्वामी वेंकटरमण
रामस्वामी वेंकटरमण
पूरा नाम रामस्वामी वेंकटरमण
अन्य नाम आर. वेंकटरमण
जन्म 4 दिसम्बर, 1910
जन्म भूमि मद्रास
मृत्यु 27 जनवरी, 2009
मृत्यु स्थान नई दिल्ली
अभिभावक रामास्वामी अय्यर (पिता)
पति/पत्नी जानकी देवी
संतान तीन बेटियाँ (पद्मा, लक्ष्मी एवं विजया)
नागरिकता भारतीय
पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
पद उपराष्ट्रपति और भारत के आठवें राष्ट्रपति
कार्य काल 25 जुलाई, 1987 से 25 जुलाई, 1992 तक
शिक्षा एल.एल.बी, स्नातकोत्तर (अर्थशास्त्र)
विद्यालय मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास
पुरस्कार-उपाधि सोवियत लैंड पुरस्कार और कई अकादमी पुरस्कार
विशेष योगदान वेंकटरमण तमिलनाडु की औद्यागिक क्रान्ति के शिल्पकार माने जाते हैं। इन्होंने ही तत्कालीन मुख्यमंत्री के. कामराज को प्रेरित किया था कि उद्योगों का राष्ट्रीयकरण किया जाए, ताकि तमिलनाडु भारत की औद्योगिक हस्ती बन सके।
अन्य जानकारी इन्होंने एक पुस्तक 'माई प्रेसिडेंशियल ईयर्स' शीर्षक से लिखी। इस पुस्तक में इन्होंने अपने राष्ट्रपतित्व काल के पाँच वर्ष की घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है।
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आर. वेंकटरमण अथवा रामास्वामी वेंकटरमण (अंग्रेज़ी: Ramaswamy Venkataraman) (जन्म- 4 दिसम्बर, 1910, मद्रास - मृत्यु- 27 जनवरी, 2009 नई दिल्ली) भारत के आठवें राष्ट्रपति थे। इसके पूर्व उपराष्ट्रपति पद भी इनके ही पास था। यह 77 वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति बने। इससे पूर्व उपराष्ट्रपति से राष्ट्रपति बनने वाले डॉक्टर राधाकृष्णन, डॉक्टर ज़ाकिर हुसैन और वी.वी. गिरि ही थे। इनका क्रम चौथा रहा। उन्होंने 25 जुलाई, 1987 को राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की। यह एक संयोग था कि 35 वर्ष पूर्व जब देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने शपथ ग्रहण की थी, तब श्री वेंकटरमण भी राष्ट्रपति भवन के उसी कक्ष में मौजूद थे। उस समय किसने सोचा था कि 35 वर्ष बाद इस इतिहास को दोहराने वाला व्यक्ति भी उस घड़ी वहीं मौजूद है।

जीवन परिचय

जन्म

रामास्वामी वेंकटरमण का जन्म 4 दिसम्बर, 1910 को राजारदम गाँव में हुआ था, जो मद्रास[1] के तंजावुर ज़िले में पड़ता है। अब यह तमिलनाडु के नाम से जाना जाता है। इनके पिता का नाम रामास्वामी अय्यर था। इनके पिता तंजावुर ज़िले में वकालत का पेशा करते थे।

विद्यार्थी जीवन

रामास्वामी वेंकटरमण की प्राथमिक शिक्षा तंजावुर में सम्पन्न हुई। इसके बाद उन्होंने अन्य परीक्षाएँ भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कीं। तत्पश्चात् उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की उपाधि मद्रास विश्वविद्यालय, मद्रास से प्राप्त की। शिक्षा प्राप्ति के बाद इनके सामने दो विकल्प थे - ब्रिटिश हुकूमत की नौकरी करें अथवा स्वतंत्र रूप से वकालत करें। इन्होंने दूसरा विकल्प चुना और 1935 ई. में मद्रास उच्च न्यायालय में नामांकन करवा लिया। यह अंग्रेज़ों के दास बनकर उनकी ग़ुलामी नहीं करना चाहते थे।

दाम्पत्य जीवन

श्री रामास्वामी वेंकटरमण का विवाह 1938 ई. में जानकी देवी के साथ सम्पन्न हुआ। इनका पारिवारिक जीवन भरा-पूरा रहा है। इन्हें तीन पुत्रियों तथा एक पुत्र की प्राप्ति हुई। इनकी तीन बेटियाँ क्रमश: पद्मा, लक्ष्मी एवं विजया हैं। लेकिन पुत्र के सम्बन्ध में वेंकटरमण को दुर्भाग्यशाली कहा जा सकता है। इनके पुत्र की 17 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई थी। यह परिवार के लिए एक बड़ी त्रासदी थी और इस शोक से मुक्त हो पाना आसान नहीं था। वक्त के पंजे जो घाव देते हैं, वह वक्त के मरहम से ही भर जाते हैं। लेकिन कुछ जख्मों के निशान अमिट रहते हैं। पुत्र की मौत भी ऐसा ही जख्म था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अगस्त 1968 में मद्रास स्टेट को तमिलनाडु में परिवर्तित किया गया था।

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