बी डी जत्ती  

बी डी जत्ती
बासप्पा दानप्पा जत्ती
पूरा नाम बासप्पा दानप्पा जत्ती
जन्म 10 सितम्बर, 1912
जन्म भूमि बीजापुर, कर्नाटक
मृत्यु 7 जून, 2002
मृत्यु स्थान बंगलौर
पति/पत्नी संगम्मा
नागरिकता भारतीय
पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
पद कार्यवाहक राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल (ओडिशा), उप-राज्यपाल (पॉंडिचेरी), मुख्यमंत्री (मैसूर)
कार्य काल कार्यवाहक राष्ट्रपति- 11 फ़रवरी 1977 से 25 जुलाई 1977

उपराष्ट्रपति- 1 सितम्बर 197425 जुलाई 1977 तक
राज्यपाल (ओडिशा)- 8 नवम्बर 197220 अगस्त 1974
उप-राज्यपाल (पॉंडिचेरी)- 14 अक्टूबर 19687 नवम्बर 1972
मुख्यमंत्री (मैसूर)- 16 मई 19589 मार्च 1962

शिक्षा एल.एल. बी. (वकालत)
विद्यालय मुंबई विश्वविद्यालय
अन्य जानकारी भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार उपराष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाए जाने की व्यवस्था है, यदि किसी भी कारणवश राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए। फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के समय बी.डी जत्ती देश के उपराष्ट्रपति पद पर थे।

बासप्पा दानप्पा जत्ती (अंग्रेज़ी: Basappa Danappa Jatti, जन्म: 10 सितम्बर, 1912; मृत्यु- 7 जून, 2002) को फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के बाद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया गया था। वह भारतवर्ष के निर्वाचित राष्ट्रपति नहीं थे। अतः इन्हें कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में ही सम्बोधित किया जाता है। भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार उपराष्ट्रपति को कार्यवाहक राष्ट्रपति बनाए जाने की व्यवस्था है, यदि किसी भी कारणवश राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाए। फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के समय बी.डी जत्ती देश के उपराष्ट्रपति पद पर थे। कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में इनका कार्यकाल 11 फ़रवरी 1977 से 25 जुलाई 1977 तक रहा। इस दौरान इन्होंने अपना दायित्व संवैधानिक गरिमा के साथ पूर्ण किया।

जन्म एवं परिवार

बासप्पा दानप्पा जत्ती का जन्म 10 सितम्बर 1912 को बीजापुर ज़िले के सवालगी ग्राम में हुआ था। बीजापुर ज़िला, कर्नाटक का विभाजित भाग भी बना। जब इनका जन्म हुआ, तो गाँव में मूलभूत सुविधाओं का सर्वथा अभाव था। इनका ग्राम मुंबई प्रेसिडेंसी की सीमा के निकट था। इस कारण वहाँ की भाषा मराठी थी, कन्नड़ भाषा नहीं। श्री बासप्पा के दादाजी ने सवालगी ग्राम में एक छोटा घर तथा ज़मीन का एक टुकड़ा ख़रीद लिया था। लेकिन आर्थिक परेशानी के कारण घर और ज़मीन को गिरवी रखना पड़ा ताकि परिवार का जीवन निर्वाह किया जा सके।

विद्यार्थी जीवन

उस समय सवालगी ग्राम में दो स्कूल थे, जो प्राथमिक स्तर के थे। एक, लड़कों का स्कूल और दूसरा, लड़कियों का स्कूल। बासप्पा बचपन में काफ़ी शरारती थे। वह शरारत करने का मौक़ा तलाश करते थे। बासप्पा अपनी बड़ी बहन के बालिका स्कूल में पढ़ने जाते और वह इनकी सुरक्षा करती थीं। दूसरी कक्षा के बाद इन्हें लड़कों के स्कूल में दाखिला प्राप्त हो गया। चौथी कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इन्हें ए. वी. स्कूल में भर्ती कराया गया, जो उसी वर्ष खुला था। यह स्कूल काफ़ी अच्छा था।

ए. वी. स्कूल की पढ़ाई समाप्त करने के बाद बासप्पा सिद्धेश्वर हाई स्कूल बीजापुर गए ताकि मैट्रिक स्तर की परीक्षा दे सकें। 1929 में उन्होंने मैट्रिक परीक्षा पास कर ली। तब यह स्कूल के छात्रावास में ही रहा करते थे। वह खेलकूद में भी रुचि रखते थे। इन्हें फुटबॉल एवं तैराकी के अलावा कुछ भारतीय परम्परागत खेलों में भी रुचि थी। खो-खो, मलखम्भ, कुश्ती, सिंगल, बार एवं डबल बार पर कसरत करने का भी इन्हें शौक़ थ। उन्होंने लगातार दो वर्ष तक लाइट वेट वाली कुश्ती चैम्पियनशिप भी जीती थी।

दाम्पत्य जीवन

उस समय बाल विवाह की सामान्य प्रथा थी और इस प्रथा की चपेट में बासप्पा भी आए। 1922 में इनका विवाह भाभानगर की संगम्मा के साथ सम्पन्न हुआ जो रिश्ते में इनके पिता की बहन की पुत्री लगती थी। विवाह के समय बासप्पा की उम्र मात्र 10 वर्ष थी और वधू संगम्मा की आयु केवल 5 वर्ष। बाल विवाह की प्रथा के अंतर्गत विवाह छोटी उम्र में होते थे लेकिन कन्या को ससुराल कुछ वर्षों बाद भेजा जाता था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

और पढ़ें

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"http://m.bharatdiscovery.org/w/index.php?title=बी_डी_जत्ती&oldid=630091" से लिया गया