मंजीत बावा  

मंजीत बावा
मंजीत बावा
पूरा नाम मंजीत बावा
अन्य नाम बावा
जन्म 1941
जन्म भूमि धूरी, पंजाब
मृत्यु 29 दिसम्बर, 2008
मृत्यु स्थान दिल्ली
पुरस्कार-उपाधि राष्ट्रीय कालिदास सम्मान, राष्ट्रीय पुरस्कार, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी मंजीत बावा पहले चित्रकार थे, जिन्होंने पश्चिमी कला में प्रभावी ग्रे और ब्राउन से हटकर लाल और बैंगनी जैसे रंगों को चुना।

मंजीत बावा (अंग्रेज़ी: Manjit Bawa, जन्म: 1941 - मृत्यु: 29 दिसम्बर, 2008) प्रसिद्ध चित्रकार थे। मंजीत बावा सूफ़ी गायन और दर्शन में अपनी विशेष रुचि के लिए भी जाने जाते थे। मंजीत बावा पहले चित्रकार थे, जिन्होंने पश्चिमी कला में प्रभावी ग्रे और ब्राउन से हटकर लाल और बैंगनी जैसे रंगों को चुना। उनके चित्रों पर प्रकृति, सूफी रहस्यवाद और भारतीय धर्म का गहरा प्रभाव था। काली और शिव को वह देश का आइकॉन मानते थे, इसलिए उनके चित्रों में काली और शिव की मौजूदगी प्रमुखता से रही। मंजीत बावा, कला में नव आंदोलन का हिस्सा थे। रंगों की उनकी समझ अद्भुत थी।

जीवन परिचय

पंजाब के छोटे से कस्बे धूरी में 1941 में पैदा हुए मंजीत बावा ने दिल्ली के स्कूल ऑफ आर्ट्स में ललित कला की तालीम हासिल की। यहाँ उन्हें सोमनाथ होरे, राकेश मेहरा, धनराज भगत और बीसी सान्याल जैसे शिक्षकों से प्रशिक्षण मिला। लंदन में 1964 में उन्होंने अपना करियर सिल्कस्क्रीन पेंटर के तौर पर शुरू किया था। वह पहले चित्रकार थे, जिन्होंने पाश्चात्य कला में बहुलता रखने वाले भूरे और धूसर रंगों का वर्चस्व खत्म करके उसकी जगह लाल और बैंगनी जैसे भारतीय रंगों को चुना। वह प्रकृति सूफी रहस्यवाद और भारतीय पौराणिक कथाओं से काफ़ी प्रभावित थे। मंजीत बावा की जीवनी लिखने वाली इना पुरी ने कहा कि वह आकाश को लाल रंग में उकेरना चाहते थे। उन्हें लाल रंग बेहद पसंद था। वह साहसिक चित्रकार थे, जिनमें लोकप्रिय प्रचलन से बेपरवाह होकर अपने प्रतिबद्धताओं पर आगे बढ़ने का साहस था। ललित कला अकादमी के तत्कालीन अध्यक्ष अशोक वाजपेई ने बावा को याद करते हुए उन्हें प्रतिबद्धताओं वाला ऐसा शख्सियत बताया, जिसने युवा कलाकारों की मदद की। उन्होंने कहा कि वह हरफनमौला हस्ती थे। उन्होंने अपनी पेंटिंग में पशु और पक्षी को अक्सर उकेरा। इसके अतिरिक्त बाँसुरी भी उनकी पसंद रही। उन्होंने प्रसिद्ध बाँसुरी वादक पन्नालाल घोष से बाँसुरी वादन सीखा। उन्होंने हीर-रांझा की कथा की पात्र राँझा की भी तस्वीर बनाई। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुत्तों से घिरे भगवान श्रीकृष्ण की बाँसुरी बजाते हुए तस्वीर बनाई। उन्होंने अपनी पेंटिंग में भगवान श्रीकृष्ण को गायों से घिरा नहीं दिखाया।[1]

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मशहूर चित्रकार मंजीत बावा का निधन (हिन्दी) वेबदुनिया हिन्दी। अभिगमन तिथि: 30 दिसम्बर, 2014।
  2. भारतीयता का अद्भुत चितेरा मनजीत बावा (हिन्दी) वेबदुनिया हिन्दी। अभिगमन तिथि: 30 दिसम्बर, 2014।
  3. http://navbharattimes.indiatimes.com/yearendershow11/3907980.cms चित्रकार मंजीत बावा नहीं रहे (नवभारत टाइम्स)

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