भू-भौतिकी  

भू-भौतिकी (अंग्रेज़ी: Geophysics) शुद्ध और अनुप्रयुक्त पृथ्वी की भौतिकी है। इसके अंतर्गत पृथ्वी की संबंधी सारी समस्याओं की छानबीन होती है। साथ ही यह एक प्रयुक्त विज्ञान भी है, क्योंकि इसमें भूमि समस्याओं और प्राकृतिक रूपों में उपलब्ध पदार्थों के व्यवहार की व्याख्या मूल विज्ञानों की सहायता से की जाती है। इसका विकास भौतिकी और भौमिकी से हुआ है। भूविज्ञानियों की आवश्यकता के फलस्वरूप नए साधनों के रूप में इसका जन्म हुआ।

विज्ञान की शाखाओं या उपविभागों के रूप में भौतिकी, रसायन, भूविज्ञान और जीवविज्ञान को मान्यता मिले एक अरसा बीत चुका है। ज्यों-ज्यों विज्ञान का विकास हुआ, उसकी शाखाओं के मध्यवर्ती क्षेत्र उत्पन्न होते गए, जिनमें से एक भूभौतिकी है। उपर्युक्त विज्ञानों को चतुष्फलक के शीर्ष पर निरूपित करने पर यह बात स्पष्ट हो जाती है। चतुष्फलक की भुजाएँ नए विज्ञानों को निरूपित करती है।

भू-भौतिकी के उपविभाग

प्रयोग और सिद्धांत की नई प्रविधियों और औज़ारों की प्रयुक्ति भू-समस्याओं पर करने के साथ साथ अन्वेषण के नए नए क्षेत्र प्राप्त होते गए, जिनका समावेश भूभौतिकी में कर लिया गया। अब भूभौतिकी के निम्नलिखित लगभग दस उपविभाग है : (ग्रह विज्ञान), वायुविज्ञान, मौसम विज्ञान, जलविज्ञान, समुद्र विज्ञान, भूकंप विज्ञान, ज्वालामुखी विज्ञान, भूचुंबकत्व, भूगणित और विवर्तनिक भौतिकी (Tectonic physics)।

अनुप्रयुक्त भू-भौतिकी के अंतर्गत धरती की सतह पर भौतिक मापनों से अधस्तल (subsurface) की भौमिक सूचनाएँ प्राप्त होती हैं। इसे भूभौतिक पूर्वेक्षण भी कहते हैं और इसका उद्देश्य उपयुक्त उपकरणों से घनत्व वैषम्य, प्रत्यास्थी गुणधर्म, चुंबकत्व विद्युत्संवाहकता और रेडियोएक्टिवता आदि मापकर पेट्रोलियम पानी, खनिज और रेडियोऐक्टिव तथा खंडनीय पदार्थों का स्थान निर्धारण करना है।

भू-भौतिक अनुसंधानों और प्रेक्षणों का समन्वय करने के लिये 'इटरनेशनल यूनियन ऑव जिमॉडिसि ऐंड जिओफिजिक्स' नामक संस्था का संगठन किया गया है। इसे संसार के सभी राष्ट्रों के राष्ट्रीय भूभौतिक संस्थानों का सक्रिय सहयोग प्राप्त है। इस संस्था की भूभौतिक मापनों के कार्यक्रम की सक्रियता कभी कभी एक दो वर्षों के लिये काफ़ी तेज हो जाती है, जैसे अतीत में दो बार अंतरराष्ट्रीय भूभौतिक वर्ष सन्‌ 1957-1958 में ऐसा किया गया।

भू-भौतिकी में सभी भौतिक प्रक्रमों और पृथ्वी के केंद्र से वायुमंडल के शीर्षस्थ तक के सब पदार्थों के गुणों का अध्ययन तथा अन्य ग्रहों के संबंध में इसी प्रकार का अध्ययन होता है। इसकी सभी शाखाओं के विषयक्षेत्र का संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत है-

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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