ऋतु विज्ञान  

ऋतुविज्ञान ऋतुविज्ञान वायुमंडल का विज्ञान है। आधुनिक ऋतुविज्ञान में वायुमंडल में होनेवाली भौतिक घटनाओं का तथा उनसे संबद्ध उपलगोले (लिथोस्फ़ियर) और जलगोले (हाइड्रोस्फ़ियर) की घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। ऋतुविज्ञान के विषय का वर्णन, जहाँ तक उसका संबंध निचले वायुमंडल की मौसमी घटनाओं से हैं, अधिकतम सुविधापूर्वक निम्नलिखित चार भागों में किया जा सकता है:

(1) यांत्रिक ऋतुविज्ञान (फ़िजिकल और डाइनैमिकल मीटिअरॉलोजी) जिसका संबंध उन प्रेक्षणयंत्रों तथा प्रेक्षणविधियों से है जिनके द्वारा वायुमंडल की ऋतुप्रभावक अवस्थाओं की सूचना प्राप्त की जाती है।

(2) भौतिक तथा गतिक ऋतुविज्ञान (फ़िजिकल और डाइनैमिकल मीटिअरॉलोजी) जिसमें प्रेक्षित ऋतु संबंधी घटनाओं का गुणात्मक तथा पारिमाणिक (क्वांटिटेटिव) विवेचन किया जाता है।

(3) संक्षिप्त ऋतुविज्ञान (सिनॉष्टिक मीटिअरॉलोजी) जो मुख्यत: ऋतु के पूर्वानुमान के लिए संक्षिप्त आर्तव (ऋतु संबंधी) मानचित्रों द्वारा संक्षिप्त आर्तव प्रेक्षणों के अध्ययन से संबंध रखता है।

(4) जलवायु-तत्व (क्लाइमैटॉलोजी) जिसमें संसार के सब भागों के आर्तव प्रेक्षणों का सांख्यिकीय (स्टैटिस्टिकल) अध्ययन होता है और उसके द्वारा उन प्रसामान्य तथा मध्यमान (औसत) परिस्थितियों का ठीक-ठीक पता लगाया जाता है जिसके द्वारा जलवायु का वर्णन किया जा सकता है।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हिन्दी विश्वकोश, खण्ड 2 |प्रकाशक: नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी |संकलन: भारत डिस्कवरी पुस्तकालय |पृष्ठ संख्या: 198 |
  2. सं.ग्रं.-आर.डब्ल्यू. लॉङली : मीटिओरॉलोजी, थ्योरटिकल ऐंड अप्लायड (1944); एच.सी.विलेट : डेस्क्रिप्टिव मीटिओरॉलोजी (1944)।
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