नाभिक  

नाभिक अत्यंत सूक्ष्म आकार का होता है और परमाणु के केंद्र में स्थित होता है। यह धन आवेशित होता है तथा नाभिक में परमाणु का लगभग समस्त द्रव्यमान केंद्रित होता है।

नाभिक के अस्तित्त्व

नाभिक के अस्तित्त्व और इसके गुणों का पता लगाने का श्रेय विख्यात वैज्ञानिक रदरफ़ोर्ड को जाता है। रदरफ़ोर्ड की प्रयोगशाला में विघटन से प्राप्त ऐल्फा (α) कणों पर विस्तृत प्रयोग हो रहे थे। इन प्रयोगों में यह पाया गया कि धातु की पतली पन्नियों में से होकर जब ऐल्फा कण जाते हैं तब वे अपने मार्ग से बहुत अधिक विचलित हो जाते हैं। उस समय तक यह माना जाता था कि परमाणु में धन और ऋण आवेश समरूप से वितरित होते हैं। इस धारणा के आधार पर टॉमसन ने ऐल्फा कणों के प्रकीर्णन की गणना की थी, परंतु प्रयोगात्मक रूप से प्रकीर्णन का जो मान प्राप्त होता था वह गणना द्वारा प्राप्त मान से कई कोटि अधिक था। इस वैषम्य को स्पष्ट करने के लिए रदरफ़ोर्ड ने 1911 ई. में नया सिद्वान्त प्रतिपादित किया, जिससे नाभिक का अस्तित्त्व स्पष्ट हुआ। रदरफ़ोर्ड ने यह माना की परमाणु में धन आवेश समरूप से वितरित नहीं होता, बल्कि उसके केंद्र पर अत्यंत सूक्ष्म आयतन में ही सीमित होता है। परमाणु के केंद्र में स्थित अत्यंत सूक्ष्म और धनावेशित भाग को नाभिक कहा जाता है। परमाणु का समस्त द्रव्यमान उसके धन आवेशों में निहित होता है और रदरफ़ोर्ड के अनुसार समस्त धन आवेश नाभिक में केंद्रित होते हैं, अत: स्पष्ट है कि परमाणु का समस्त द्रव्यमान उसके नाभिक में केंद्रित होता है। इस प्रकार मोटे रूप में रदरफ़ोर्ड ने 1911 ई. में नाभिक का अस्तित्त्व सिद्ध किया।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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